सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 251, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय ११
युगसंबत्सरादि फलाध्याय
कलियुग जन्म फल--बडा कामी, घन से हीन, यशहीन, दुराचारी, दुष्ट बुद्धि, भनेक
प्रकार से दुखी ।
द्वादश युग फल--
६० वषं में १२ युग व्यतीत हो जाते हैं 1 यहाँ प्रत्येक ५ वर्ष का १ युग माना है 1
१२ युगों के फल :
१ युग--मद्य मांस अक्षी, परदारा रत, बड़ा कवि, बड़ा कारीगर, वुद्धिमान ।
२ युग--वाणिज्य व्यवहारी, घामिक, संत्यवादी, द्रव्यलोभी, अतिपापी 1
३ युग --भोक्ता, दानी, देव ब्राह्मण पूजक, बड़ा तेजस्वी, धन युक्त ।
४ युग--बाग बगीचा; खेत की प्राप्ति, दवा सेवन का प्रेमी, घातु विषयक कर्म
में घन नाशक । 2
५ युग--पुत्र संतति हो, घनवान, इन्द्रिय जीत, माता-पिता का प्रिय ।
६ युग अनेक शत्रुयुवत, बड़ा नीच, सदा भैंस की सेवा करने में प्रसन्न, पत्थर
हारा अपघात हो, बड़ा भयभीत ।
७ युग- बहुत मित्रों का प्रिय, अनेक मनुष्यों का प्यारा, व्यापार में कुटिल बुद्धि,
शीघ्रता से चलने वाला, अतिकामी ।
_ ८ युगं--पापकर्म कर्ता; व्याधि और दुःख से युक्त; संतोष युक्त, जीवों की हिसा
करने वाला । i
९ युग--कुआ तालाब बावली आदि बनवाने वाळा, देव-अतिथि प्रेमी, इन्द्र के
समान प्रतापी । 2
१० युग--राजा का मन्त्री, सुन्दर रूप, सुन्दर वेश करनेवाला, दानी, स्थानप्राप्ति
के कारण महा सुखी ।
११ युग--बड़ा बुद्धिमान, बड़ा सुशील, युद्ध में शूरवीर । !
१२ युग--बड़ा प्रतापी, सदा प्रसन्न, मनुष्यों में श्रेष्ठ, खेती और व्यापार करने
चाला ।
६० सम्ध॑त्सर हैं उनमें जन्म का फल च
(१) प्रभव में--साहसी, सत्यवक्ता, समस्त. गुणयुक्त, घर्मवान, कालज्ञ सम्पूर्ण
वस्तुओं के संग्रह में तत्पर, पुत्र संतानवाला, श्रेष्ठ बुद्धि, भोगी, दीर्घायु, विद्वान,
बलवान, क्रूर स्वभाव । B
(२) विभव--कामी, मित्र संतुष्ट, धनवान, बंधु विद्याय युक्त अतिचंचल स्त्रियों
जैसे स्वभाव वाला, परोपकारी, चोर, भोगी, बलवान, कलाविद कुल में राजा के समान,
शीलवान, पण्डित । -
(३) शुक्छ-बलछ रहित, परस्त्री गामी, त्यागी, सुशीछ, बड़ाशांत, निघंन,
परोपकारी, विद्या और नम्रता युक्त, श्रेष्ठ पुत्र ओर स्त्री, श्रेष्ठ भाग्य, शुद्धता पुर्वक
रहने वाला । | - š