भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२३६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(४) प्रमोद--जोलने में चतुर, मंत्री, कार्य में लीन, दाता, पुत्र से आनन्दयुक्त,

गुणवान, चतुर, धूर्त, अभिमानी, पराया. कार्यं करनेवाला, बांधवों से शत्रुता. रखने

वाला, राज्य कुल में पूज्य, मित्रों से झगड़ा, कभी लक्ष्मी, कभी भार्यायुक्त ।

(५) प्रजापति या प्रजाधीश--धर्म करने वाळा, दान में तत्पर, धनवान, शांत,

पुत्रवान, दयावान, सुन्दर शोल, देव, ब्राह्मण पुजक, नम्र, भोगी, धन के कारण देशों में

विख्यात, स्त्री का अभिमानी, प्रजा पालन में प्रसन्न ।

(६) अंगिरा--नीतिज्ञ, निपुण, घनी, कृपाळू, स्त्री से सुखी, भोगी, मानी, प्यारी

बोली, दीर्घायु, बहुत पुत्र, धर्मशास्त्र मंत्रशास्त्र आदि शास्त्रों में प्रवीण, अतिथि. एवं

मित्रों का भवत, छिपी बुद्धि। :

(७) श्रींमुख--लक्ष्मीवान, सदा प्रतापी, शास्त्रों का ज्ञाता, सुन्दर पति, मित्रो को

प्रिय, बलवान, उदार, श्रेष्ठ कीति, देवभक्त पाखण्डी, धनवान, पवित्र, परस्त्री में प्रेम ।

(८) भाव--श्रेष्ठ चित्त, यशस्वी, गुणी, दानी, नम्र, बंधुजनों को प्रिय, विचार￾कुशल, मछली के मांस का प्रेमी, बलवान, धनवान, योगी, राज्य करने वाछा 1

(९) युवा--प्रसन्न, नञ्ज, गुणवान, शांत, दानी, दृढ़ देह, श्रेष्ठ बुद्धि दीर्घायु, जल

से डरने वाला, स्त्री निमित्त दुःखी, व्याधि और दुःख से पीड़ित, लोभी, चंचल बुद्धि,

क्रोधी, ऋणदेह, वैद्य, सबसे प्रेम व्यवहार ।

(१०) घातृ या धाता--गुणवान, गौरवयुक्त, गुरुभक्त, शिल्पविद्या में चतुर, शीलवंत,

सुन्दर रूप, धनवान, शठ, परस्त्री में प्रेम, दीन रक्षक ।

(११) ईइवर--शीध्न क्रोधित होने वाला, प्रतापी, चतुर, गुणवान, प्रसन्न चित्त,

शीलवान, कलाओं में कुशल, घनवान, भोगो, कामी, पशुपालन का प्रेमी, अर्थ धर्मयुक्त,

बलवान, बुद्धिमान ।

(१२) बहुधान्य--व्यापार में चतुर, राजा से मान्य, दानी, अभिमानी, शास्त्रज्ञाता,

अन्न और धनयुक्त, कला और संगीत में कुशळ, सत्कर्मो, भोगी, मद्य पीनेवाला ।

(१३) प्रमाथी-क्रूर, पापी, “क्रोधी, वंधुहीन, सुखी, अनेक व्यसन युक्त, दूत कर्म

करने वाला, पर दारा, पर धन प्रेमी, शत्रु नाशक, मन्त्री, शास्त्र का ज्ञाता, रथ, घ्वजा, घोड़े, छत्र आदियुक्त ।

(१४) विक्रम--पराक्रमी, धनी, सेनापति, सदा संतोषी, प्रतापी, अनेक विद्या का

ज्ञाता, शत्रु नाशक, उदार, बलवान, चतुर, उम्र कर्म करने में तत्पर 1

(१५) वृष--निलंज्ज, दरिद्री, कमंहीन, मोटा पेट, स्थूल शरीर, छोटे हाथ, कुल￾निंदक, बहुतों से घन का लेनेवाला, भाळसी, लोभी, मलीन, बहुत जनों का स्वामी,

पराया काम करने वाला, निद्यशील, कार्य में अधिक बात करनेवाला ।

(१६) चित्रभॉनु--चित्र-विचित्र पुष्यों को धारण करनेवाला, चिन्तायुवत, कला-

युक्त, शीलवान, तेजस्वी, घमण्डो, देवपूजा प्रेमी, दृढ़, हीन कर्म करनेवाळा । |

(१७) सुभानु--सव॒ वस्तुओं का संग्रहकर्ता, श्रेष्ठ कांति, बुद्धिमान, शत्रुओं को

जीतनेवाला, नग्न, प्रसन्न चित्त, निज कुल की विद्या और आचारयुक्त, वैभवयुकत । .