सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराशि एवं नक्षत्र-गुणघम : ९
नवांश के अनुसार सम-विषम विचार से राशि की धातु-जीव संज्ञा
'विबम राजि में-प्रथम नवांश से आरम्भ कर घातु मूल जीव क्रम से ३ आवृत्ति, सस राशिञे- ,, , ,, जीव मूल घातु इस क्रम से ३ आवृत्ति से
वर्तमान नवांश तक गिनना 1
चिषम राशि-क्रर और पुरुष राशि है-इसमें जन्मा-तेजस्वी होता है ।
ससर रावि-सौम्य और स्त्री ,, -,, ,; -मुदु होता है
<<= स्वामी को दिशा-कहने का तात्पर्य यह है कि लग्नेश जिस दिशा में बलवान् हो
उसी दिशा में लाभ होता है या प्रश्न काल में नष्ट वस्तु भी उसी दिशा में
मिलती है ।
शास्त्रीय राशि-मिथुन तुला कुम्भ 1
शशि मेत्री-(१) अग्नि और वायु राशि आपस में मित्र हैं।
(R) भूमि और जछ॒ ,, „ #
(३) इसमें १ और २ की आपस में शत्रुता है ।
(४) पुरुष राशि की पुरुष और स्त्री राशि की स्त्री राशि से मित्रता है।
रानि बली राशि-पृष्ठोदय और मिथुन जिनका संबंध चन्द्र से है ।
पिभ घळी ,, -शेष ६ राशि जिनका संबंध सूर्य से है ।
गत सूर्य की राशि से ४ राशियाँ क्रम से गिनने पर
(१) ऊध्वं-ऊपर की ओर
(२ ) अघः-नीचे की ओर इसी प्रकार क्रम से शेष ८
(३) सम-वराबर जग्रह और राशियों को समझो ।
( ४ ) वक्र-नवी जगह
शीर्षोदय राशि सें प्राप्त ग्रहू--दद्या के आदि में फल देते हैं ।
पुष्ठोदय ,, ४ 72 अन्तमें , „,
उभयोदय ,, ७ 2) सदा ती. ७6)
नक्षत्र और उनके भिन्न भिन्न नाम
१ अश्विनी- तुरंग, दर, अच्वियुग, हय
२ भरणो--कृतांत, ग्राम्य
३ फुत्तिफा--हुताशन, अग्नि, बहुला
४ रोहिणी-विधि, विरिचि, शकट
'५ मुगशिर--सौम्य, चान्द्र, अग्रहायणी, उप
६ भाद्रा-तारका, रोद्र
७ पुनर्वसु--अदिति, सुरजननी
८ पुष्य--तिष्य, अम रेज्य
s झ्लेषा--आएलेषा, अहि, सुजग