भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

१० सघा--पितृ, जनक

११ पूर्वा फाल्गुनी--फल्गुनी, भाग्य

१२ उत्तरा फाल्गुनी--अयंमा, उत्तर, भग

१३ हस्त--भानु, अरुण, अकं

१४ चित्रा- त्वष्टा, सुरवर्धकि

१५ स्थाती--मरुत, वात, समीरण, वायु, समीर

१६ विश्ाखा-द्विदैवत, इन्द्राग्निक, शूपंक

१७ अनुराषा--मैत्र

१८ ज्येष्ठा--कुलिश तारा, शतमख, सुर स्वामी

१९ मूल--असुर, क्रतुभुज

२० पुर्वाषाढा--पयः, सलिल, जल, तोय

२१ उत्तराषाढा--विश्व

) २२ अवण--श्रोणा, विष्णु, हरि, श्रुति

२३ घनिष्ठा- श्रविष्ठा, वसु

२४ शतभिषा--प्रचेत:, शत तारका, वरुण

२५ पूर्व भाद्र पद--अजैकपाद, अजपात, पूर्व प्रोष्ठपद

२६ उत्तर भाद्रपद- अहिबु'घ्न्य, उत्तरा, प्रोष्ठपात्‌

२७,रेवती-पृषा, पोष्ण

नक्षत्र २७ हैं उनके १०८ चरण हैं ।

ज्योतिष चक्र दिन में एक बार पूर्व से पश्चिम घूमता है। इस चक्र गें रवि चंड

शनि आदि ग्रह पश्चिम से पूर्व को घूमते हैं ।