सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंराशि एवं नक्षत्र-गुणधमं : ११
नक्षत्र स्वामी और भेद
_क्रम नक्षत्र | x चरादि| मुख योनि | वैर-योनि। गण | नाड़ी
१ अच्विनी x क्षिप्र | तिर्य अश्व x जैस | देव | आय कु मार २ भरणी | यमराज| क्रूर | अघो गज | सिंह |मनुष्य| मध्य ३ कृतिका | अग्नि | मिश्र | अघी मेढा | वानर |राक्षस| अत्य
४ रोहणो | ब्रह्मा | धुव | =£ सर्प मनुष्य| अंत्य
५ मृग चंद्र | मृदु | तियं
६ आदर | रुद्र | तीक्ष्ण| s=
७ पुनव्सु | अदिति| चर | त्यं
< पुष्य वृ. पति| क्षिप्र | उर्ध्व ९ लेपा [सर्प | तीक्षण | अघो
१० मघा |पितर | क्रूर | अधो
११ पृफा० | भग, | क्रूर | अघो
१६ gor. |अर्यमा | घव | ऊध्वं
१३ हस्त |सूयं | क्षिप्र | तिर्य १४ चित्रा | विदवक.| मृदु | तिर्य
१५ स्वाती |वायु | चर | तियं
१६ विशाखा | इन्द्र. अ! मिश्र | अधो
१७ अनु० [मित्र | मृदु | तियं
१८ ज्येष्ठा | इन्द्र | तीक्ष्ण | तियं
१९ मूल | राक्षस | मध्य
२० पु. षा. छ | क्रर अघो
२१ उ. षा. | बिषवेदे| घव | अघो
२२ अभ. | ब्रह्मा | क्षिप्र | ऊर्घ्व
२३ श्रवण | विष्णु | चर | »
२४ घनिष्ठा | वसु | चर | ऊ
२५ शत० वरुण | चर | ऊध्वं
२६ q. भा. | saq] क्रूर | ऊर्ध्व
२७ उभ्भा. |अहिंब',
२८ रेवती qar मृद् ऊध्वं
[सुय]
नक्षत्र की धातु-मूल-जोव संज्ञा
नक्षत्रों को अश्विनी आदि नक्षत्र के क्रम से घातु मूल ओर जीव संज्ञा होती है ।
१ धुव च स्थिर नक्षत्र-उ. फा, उ. पा; उ. भा., रोहिणी ब रविवार । ये मृदु नक्षत्र
के बराबर हैं । इनमें नगर-प्रवेश, राज्याभिषेक, बगोचा आदि लगाना शुम है ।
२ चर च चल नक्षत्र-स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतमिष और सोमवार । wç
नक्षत्र भी इनके बराबर हैं । इनमें सब प्रकार के घोड़ा आदि वाहन, बाग-बगीचा
लगाना, पालकी-रथ आदि में बैठने का कार्य करता शुम है