भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

३ कूर घ उग्र-पु.फा; पू.षा., पू.भा. भरणी, मघा और मंगळवार । दारुण नक्षत्र भी

इनके बराबर हैं । इनमें शठत्व करना, नाश करना, विष देना, वंघन, उत्साह, शस्त्र

चलाना आदि कार्य होता हे ।

४ सिश्ष व साघारण-विशाखा, कृत्तिका और बुघवार । SW नक्षत्र भी इनके बरावर हैं ।

अभिषेक, खेत में बीज बोना, ग्राम, नगर-प्रवेश, बाग-वृक्ष लगाना, शान्ति कर्म

आदि इनमें होता ë ।

५ क्षिप्र व लघु-हस्त, अश्विनी, पुष्य, अभिजित्‌, और गुरुवार । चर नक्षत्र भी इनके

बराबर हैं 1 व्यौहार, भूषणघारण, कलाकौशल; क्रीडा, औषधि देना-लेना, ज्ञानविद्या,

सुधारणपना, स्नान करना इनमें होता है ।

“६ मुदु व सेन्न-मृग, रेवती, चित्रा, अनुराधा और शुक्रवार। मित्राचारी, स्त्री-संग, वस्त्र￾धारण, गायन-वादन विद्या, नाना प्रकार का मंगल-कायं, सुखप्राप्ति इनमें करना ।

“७ तीक्ष्ण व दारण-मुल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आएलेषा और शनिवार । भूतादिक पीड़ा निवा-

रण करना, द्रव्य काढ़ना, मंत्र साधना, बंधन, भेद करना, बघ करना, ये कार्य इसमें- करना ।

अंधादि लोचन नक्षत्र

१ अन्य लोचन-घनिष्ठा, पुष्य, . रोहिणी पू.षा. विशाखा; उ.फा. रेवती-शीघ् मिले ।

र ही हत्त, उ.षा., अनुराधा, शतभिष, एलेषा, अश्विनी, मृग-घड़े उपाय ।

३ वथ मघा, पू.भा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजित्‌, भरणो-दूर से सुन पड़े, I

४ सुलोचन-स्वातो, पुनर्वसु, श्रवण, कृतिका, उ.भा., पु.भा., मूल,पु. भा.-किसी प्रकार

. न मिले ।

१ अधोमुख नक्षत्र-मुल, कृत्तिका, मघा, विशाखा, भरणी, आइलेषा, पुर्वफाल०, पूषा.

पु. भा.---इनमें बावड़ी, आं, तालाव, खाई आदि खोदना,. द्रव्य काढ़ना

ओर रखना, जुआ खेलना, विलान्तःप्रवेश, गणितारंभ करना 1

२ तियंडमुख-ज्येष्ठा, पुनर्वसु, हस्त, अश्विनी, मृग, रेवती, अनुराधा, स्वाती, चित्रा ।

इसमें हाथी, बेल, घोडा आदि लेना, नाव पानी में डालना, यंत्र हल आदि

चलाना, धारण करना, गमन आदि करना ।

३ ऊध्वं मुख-पुष्य, आर्द्रा, श्रवण, उत्तराफा०, उ. षा., उ. भा, शतभिष, रोहिणी,

घनिष्ठा । इनमें देवस्थान, घ्वजा, मंडप, घर, कोट, भीति, तोरण, राज्या-

भिषेक आदि करना ।

'ताराविचार ( जन्म नक्षत्र से तारा विचारना )

जन्म नक्षत्र से दिन नक्षत्र तक ३ आवृत्ति से तारा सिद्ध होता है । जिस दिन

तारा विचारना हो जन्म नक्षत्र से उस दिन तक गिनकर ९ का भाग देना तो

शेषतारा इस प्रकार होगा»