सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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राशि एवं नक्षत्र-गुणधर्म : १३
दोष १ २ š x प् ६ ७ ८ टु
नक्षत्र १ २ š ४ ५ ६ ७ ८ ९ सि १० ११ १२ १३ १४ १५ १६ १७ १८
१९ २० २१ २२ २३ २४ २५ २६ २७
जन्म जन्म संपत विपत क्षेम प्रत्यरि साधक बघ मित्र अति मित्र श शुभ शुभ अशुभ शुभ अशुभ शुभ अशुभ शुभ शुभ
अन्य सत :--( सर्व० चितामणि )
क्रम १ २ ३ ४ ५ < ७ < ९
स्वामी qi बुध राहु गुरु केतु चंद्र शनि शुक्र मंगल
फल ताव कांति हानि घारण लय कीति हानि प्रसन्नता मृत्यु
नक्षत्र दो प्रकार के Š
( १ ) दिन नक्षत्र--प्रतिदिन चन्द्रमा जिस नक्षत्र पर रहता है वह दिन नक्षत्र है।
( २) सूयं नक्षत्र--जिस नक्षत्र पर सूर्य हो वह सूर्य नक्षत्र है ।
इसी प्रकार कोई ग्रह जिस नक्षत्र पर हो वह उस ग्रह का नक्षत्र है |
नक्षत्र भाव वृद्धि--जो नक्षत्र ६० घड़ी पुणं होकर दूसरे दिन चला जावे ओर दुसरे
दिन का स्पशं हो जावे अर्थात् घटिकाओं में जो नक्षत्र पड़ता है उसे भाव-चुद्धि
कहते हैं ।
फल-ऐसे नक्षत्र में जन्म हो तो जातक की श्री अर्थात् शोमा, आयु, नेरुज्यता होती है ।
तिथि आदि में भी ऐसा ही फल विचारना ।
क्षय नक्षत्र या
क्षय तिथि फल
लग्न नक्षत्र और तिथि फल: में कौन बडा है,
_ तिथि फळ नक्षत्र फल लग्न फल इन सब के समूह से
१ गुना १० गुना लक्ष गुना फल आदि विचारना t
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अध्याय २
१२ भाव और उनके गुणधर्म
भावों के भिन्न-भिन्न नाम
(१) रून--होरा, तनु, मूति, उदय, सिर, कल्प, देह, रूप, शीर्ष, वत॑मान, जन्म,
आत्मा, अंग, वपु, आद्य, केन्द्र, कंटक, चतुष्टय, प्रथम ।
( २ ) धन--वाक, वित्त, कुटुम्ब, नेत्र, विद्या, स्व, अन्नमान, मुक्ति, दक्षाक्षि, आस्य,
पत्रिका, अर्थ, कोष, स्वघन, द्रव्य, स्वयं, पणफर, द्वितीय ।
इसमें जातक के उक्त फल का क्षय होता है ।