भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२४० : ज्योतिष-शिक्षा, q तीय फलित खण्ड

(६०) क्षय-- कुटुम्ब में कलह, मद्य पान, वेष्या संग का प्रेमी, कठोर चित्त, “माती

शत्रुहीन, निरोग, सेवा में तत्पर, शिष्टाचार वाला पर घमं अघमं के विचार.से शुन्य ।

अयन फल

मकरादि---उत्तरायण-शिशिर आदि ३ ऋतु=्देव का दिन ।

कर्काद--दक्षिणायन-शेष ३ ऋतु=्देव की रात्र ।

१ उत्तरायण--रूपवान, गुणी, प्रतापी, सब शास्त्रों में प्रेम, धर्मार्थ काम विषय में

कुशल, प्रसन्त चित्त, उदार, घैयंवान्‌ आचार में तटार, दीर्घायु, पुत्र स्त्री इनसे संतोष ।

२ दक्षिणायन--झूठ वकता, अवर्मी, रोगी, अभिमानी, खेती करने वाला, गो-भेंस

आदि चतुष्पद युक्त, कठोर, शठ, किसी की बात न सहन करने वाला, बोलने में चतुर ।

गोल फल

मेषादि-उत्तर गोल, तुलादि--दक्षिणं गोल । `

उत्तरगोल--घनवान, विद्वान, पुंत्र-पौत्र युक्त, राजमान्य 1 .

दक्षिण गोल--सदा सुख से हान, झुठ ववता, दुराचारी, अंगहीन, घन रहित t

ऋतुफल

(१) शिशिर--मकर कुंभ के सूर्य में (२) वसंत--मीन, मेष के सूर्य में ।

(३) ग्रीष्म--वृष, मिथुन के सूर्य में (v) वर्षा--कर्क सिंह के सूर्य में ।

(५) शरद--कन्या तुला के सूर्य में । (s) हेमन्त--वृश्चिक घन के सूर्य में

(१) शिशिर--अमिमानी, उद्दंड, कामी, मिष्टान्न प्रेमी, बलवान, क्षुघायुबत, पुत्र,

स्त्री सहित, रूप यौवन सम्पन्न, यशस्वो, दानी, मानी श्रेष्ठ कर्म करने वाला, सुखी ।

(२) वसंत--परिश्रमी, धैर्यवान, तेजस्वी, बुद्धि मान, प्रतापी, गाने-बजाने में चतुर,

  • ` शास्त्रविद, प्रसन्न चित्त, उद्यमी, अनेक देशों में रत, बहुत कार्य करने वाला सुगन्ध

प्रिय, घनिक दीर्घायु ।

  • (३) ग्रीष्म--ऐश्वयंवान, विद्या घन, अन्न युत, भोगी, वाचाल, क्रोधजित, दानी,

, बुद्धिमान, शूरवीर, जलविहार, प्रिय, लम्वा शरीर, कृश तनु ।

(४) वर्षा--बुद्धिमान, प्रतापो, घाड़े से प्रीत, भोगी, गुणी, राजमान्य, जितेन्द्रिय,

चतुर, कफ और वात युक्त, घातु .वादी, सुवचन, स्वच्छ बुद्धि, क्षीर दूध, कटु

पदार्थ का ग्रेमी ।

(५) शरद--वाणिज्य तथा खेती द्वारा जीविका, प्रतापी, प्रतिष्ठित, धनघान्य युक्त,

क्रोध हीन, वात प्रकृति, अभिमानी वाहन युक्त, संग्राम प्रिय, पुण्यात्मा, कामी ।

(६) हेमंत--व्याधि युक्त) तेजहीन, नम्र, पराक्रमी, श्रेष्ठ md और घर्म युक्त

चतुर, उदार, कृषक, भोगी, कृष, शरोर।।

मास फल

१. चैत्र--लालनेत्र, अहंकारी, क्रोधी, भोगो, श्रेष्ठकर्म, विद्या विनययुक्त, मधुर

अन्न भोजी । शास्त्रज्ञाता, सत्पुरुषों से मित्रता, कलाविद, विचित्र यंत्र ।