भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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युग संवत्सरादि फलाध्याय ११ : २३९

व्यापार में प्रतिष्ठा, कर्म में आळसी, देशों म॑ भ्रमण करने वाला, देव ब्राह्मण का प्रेमी,

धनवान, कटुवचन भाषी 1

(४७) प्रमादी-- दुष्ट, अभिमानी, कलही, लोभी, अल्प बुद्धि, बुरे कर्म, परस्त्री

अमी, बंधुओं से विराग, ईश्वर. पूजक ।

(४८) आनन्द-चतुर, पंडित, कृतज्ञ, नम्रता युक्त, पत्रों से आनन्द, बहुत स्त्री

अतिथियों का सेवक, धनवान, प्रसन्त चित्त, तत्वज्ञानी, वेद शास्त्र प्रेमी, सदा आनन्द

युक्त ।

(४९) रासक्ष--क्रूर, खोटे कर्म, कलह कारक, श्रेष्ठ घर्महीन, दयाहीन, साहसी,

मछली के मांस का प्रेमी, हिसक वृत्ति, मद्यपान ` करे, निष्प्रयोजन पाप कर्म करे, पापी,

अपकारी, वृथावफ़वादी ।

(५०) नल--श्रेष्ठ बुद्धि, खेती से घान प्राप्त, वैश्य वृत्ति.में चतुर, थोड़ा घन,

सुशील, चपल, बहुत जनों का पालक, अनेक पुत्र व मित्र, द्रव्य लोभी, कलह प्रिय, दानी,

-गुणी, शांत, सदाचारी ।

(५१) पिंगलळ--पीले नेत्र, शठ, त्यागी, निषिद्ध कमं करने वाला, अति कठोर,

पित्त कोप से रोग, अनेक वाहन, मन को जीतने वाला, तपस्वी !

(५२) काल युक्‍त--खोटी बुद्धि, बहुत बोलने वाला, कलहकारी, विकरालरूप,

खेती और व्यापार करने वाला, कालज्ञ, घन का उपयोगी, प्रीत वाला, क्रय विक्रय का

काम करने वाला l :

(५३) सिद्धार्थी--उदार चित्त, दयावान, संग्राम में यश, सुन्दर केश, मन्त्री

पुजनीय, वेद शास्त्र ज्ञाता, सुकुमार, कोमल चित्त, कवि, विद्वान, सिद्धार्थी, गुरु तथा

देव का भक्त । :

(५४) रोद्र--भयंकर पशुओं का पालक, धूर्त, विवादी, अपयशी, रौद्र स्वरूप चोर,

चपल, निर्दय कम करने वाला, दुराचारी, पर स्त्री गामी ।

(५५) दुमंति--खल, कामी, पापी, दुष्ट बुद्धि अभिमानी, अपने वाक्य का qeq

करने वाला, प्रसन्नता हीन शोक से संतप्त ।

(५६) दुंदुमि--राजा से. गौरव प्राप्त, वाहन, सुवर्ण, भूमि, गीत वाद्य नृत्य में प्रेम

मंत्र औषधि आदि जानने वाला, स्थूल शरीर भोगवान ।

(५७) रुघिरोंदुगारी--क्रोषी, वायु और रुधिर के रोग, कफ वात प्रकृति, झूठी

गवाही देने वाला, सुखी, घनवान बुद्धिमान, लाल नेत्र ।

(५८) रक्ताक्षि या रक्ताक्ष--आचार और घमं में तत्पर, नेत्र रोगी, कामी, देश

का त्याग करने«वाला, सर्वत्र हानि युक्त, विना विवाह के स्त्री रखे, शीलवान बंधुजन

का प्रिय, शांत ।

(५९) क्रोधन--पर कायं में विघ्न; कर्ता, क्रोधी, अयंकर स्वरूप, पराक्रमी पर स्त्री

गामी, बंधु से वर, चोरी में विरत, दूसरों से जीविका करने वाला ।