सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 258, कुल 418 में से
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२४२ t ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय खण्ड फलित
जन्म के समय का फल
प्रातः--घर्म में युक्त, सत्कर्म में जीवन सुखी ।
मध्याज्ञ--गुणवान, राजा के तुल्य ।
अपराह्ल--घनी ।
सायंकाल--सुगंघ और स्त्री में प्रीत, खल, भ्रमणशील ।
रात्रि में-सायंकाल सदुशफल ।
सूर्योदय के समय--बहुत सौर्य वाला ।
तिथि जन्म फल :
१. प्रतिपदा--महा उद्योगो, घर्माचरण वाला, दुष्ट संग, कुल संत्राप कारक,
व्यसनी, प्रनही न, विद्यावान, परिवार युक्त, अन्यमत से बहुत घन ।
२. द्वितीया--परस्त्रीगामी, चोर, स्नेह रहित, सत्य और पवित्रताहीन, दानी,
दयावान, प्रसन्नचित्त 1
३. तृतीया--विफळ, चेतना रहित, द्रव्यहीन, परद्वेषी, परदेशवासी, अभिमानी,
बुद्धि पूवंक बोलने वाला, कामी ।
४. चतुर्थी--भोगी, दानी, मित्र से स्नेह, घन संताप से युक्त, साहसी, विवादी
चंचल, जुआड़ी, ऋणी ।
५. पंचमी--व्यवहार कुशल, माता पिता का रक्षक, गुणग्राही, अल्प प्रीत, दयालु,
दानी, भोगी, कामी, शास्त्र का ज्ञाता ।
६. षष्ठी--भ्रमण शील, कलह कारक, क्रोधी, बुद्धिमान, पराक्रमी, पेट में दोष
बाला, घन पुत्र युक्त, घाव युक्त देहू ।
७. सप्तमी--संतोषी, तेजस्वी, धनवान, पराया धन हरण करे, कन्या संतान, शत्रुनाशक, बलवान, प्रकृति देवपूजन में चित्त ।
८. अष्टमी-घर्मात्मा, सत्यभाषी, दानी, भोगी, दयावान, गुणज्ञ, चंचल चित्त
स्त्रियों का प्रेमी, कफ प्रकृति, कामी, पुत्र स्त्री में लीन ।
९, नवगी--देवपूजक, पुत्रवान, शास्त्राम्यासी, धन और स्त्री में आसवत मन,
कठोरवाणी, श्रेष्ठ बुद्धि, पदाचार और आदरहीन, दुष्ट स्त्री पुत्र वाला ।
१०. दशमो--देव सेवक, यज्ञ कर्ता, तेजस्वी, सुखी, उदार चित्त, नम्न, लम्बा कंठ,
बहुत शास्त्रों का ज्ञाता, कामी, घनव।न, धर्मात्मा, चतुर ।
११. एकादशो--संतोषो, बुद्धिमान, घन पुत्र युक्त, ब्रत, दान में चित्त, देवब्राह्मण
पूजक, प्रसन्न चित्त, राजा के घर जाने वाला, उत्तमकर्म ।
१२. द्वादश--चंचळ चपल, क्षीण अंग, भ्रमणशील, जल से प्रीत, पुत्रवान, राजा
से घन प्राप्त, धनी, पंडित, व्यवहारशील ।
१२. वयोदशी'-सिद्ध, बुद्धिमान, शास्त्र अम्यासी, जितेन्द्रिय, परोपकारी, sest
गर्दन, शूरवोर, चतुर, कामो, लोभी, घनी ।