भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२५८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

क्षण, ५ चरण--देवांश, ६ चरण--पृत्रवान्‌, ७ चरण--उत्तम, ८ परण--महीपति,

९ चरण--घनेश्वर, उभय पक्ष तारक ।

११-कुंम राशि

१ चरण--मध्यम, २ चरण--श्रीमान्‌, ३ चरण--तेजहीन, कष्टयुक्त, ४ चरञ-=

पुत्रवान्‌, ५ चरण--राजमान्य, ६ चरण--पाप कमं करने में हीन, ७ चरण-¬

योगीन्द्र, ८ चरण--अंगहीन, ९ चरण--शुम लक्षण युक्त ।

१२-मीन राशि

१ चरण--षनवान्‌, २ चरण--कालहीन, ३ चरण--रम्पट, ४ घरण-घनवान्‌,

५ चरण--चोर, ६ चरण--कपटी, ७ चरण--निर्घन, ८ चरण--भाग्यवान्‌,

९ चरण--बलेश युक्त ।

सम्वत्सर आदि के जन्म में फल का समय

(१) जन्म समय फे सम्वत्सर का फल--सावन वर्षपति की दशा में होता है ।

(२) अयन और ऋतु का फल- सुर्य की दशा में होता है ।

(३) मास का फल-- मासपति दथा में होता है ।

(४) गण्ड का फल--चन्द्रमा की दशा में होता है ।

(५) नक्षत्र का फल--चन्द्रमा की दशा में होता है ।

(६) पक्ष का फल--चन्द्रमा की दशा में होता है ।

(७) तिथि ओर करण का फल चंद्र का अंतर ओर सूर्य की दशा में होता है ।

(८) वार का फल--वार के स्वामी को दशा में होता है।

(९) योग का फल--सूर्य चंद्र में जो बली हो उसकी दशा में होता है ।

(१०) लग्न का फल--लग्न पति को दशा में होता है ।

(११) दृष्टि, भाव, राशि का फछ--इनके स्वामियों की दशा में होता है । जन्म वेला का फल

यहाँ आघा-आधा पहर की सत रज तम को एक-एक वेला चक्र में बताई गई है । दिन में ८ पहर होते हैँ । ८% २० १६ प्रहरार्ड हुए। यहाँ तम सत रज ये ३ गुण क्रमानुसार दिये हैँ । जन्म के समय दिन के ओर प्रहराद्धं के विचार से जो गुण प्राप्त हो उसका फळ नीचे दिया है ।

वेलानुसार उत्पन्न गुण फल

१. सत्व वेला में--वाग्मी, शिष्टाचार वाला, धर्मी, तपस्वी, नित्य उत्साह करने वाला, निर्मल, दानी, तेजस्वी, विद्वान्‌, पुण्यवान्‌, सत्य वक्ता, शत्रु रहित ।

२. रजो वेला में--घन सुख या, रूपवान्‌, शनुओं को जीतने वाला, कामातुर बुद्धि, बिना दरबार मित्र वाला ।

३. तमो वेला में--पराया घन, पर स्तरो को ग्रहण करने वाला, , शरे ` का स्वामी, मित्र, द्विज, गुरु इनका विरोधी, चंचल न्हे वाला । डल रहित