भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 288

२७२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

में जो बलवान्‌ ग्रह हो उससे विचारे । राशि बल विशेष हो तो लर्न नवांश के तुल्य

होगा । ग्रह बल विशेष हो तो ग्रह नवांश के तुल्य होगा ।

(२) बुध जिस नवाँश में हो उस नवांश राशि के अनुरूप रूप होगा । जैसे मेष से

चौपाया सदृश आदि 1

(३) बलवान्‌ ग्रह के अनुसार नेत्र होंगे।

चंद्र नवांश स्वामी के सदृश वर्ण होगा 1

(१) कुछ, जाति, देश आदि का विचार कर कहना । जैसे इंग्लैण्ड में गोरे होते हैं,

अफ्रिका में काले होते हैं या यहाँ भील कोल किरात आदि काले होते हैं । इन सब बातों

का विचार रखना चाहिए ।

(२) लग्नेश व लग्न में जो ग्रह हो उसके विचार से उसके समान वर्ण और उसी केः

समान आचार वाला होगा ।

(३) ९ या ५ भाव के स्वामी के अनुसार रंग और गुण भी होता है 1

जातक का गुण

(१) सूर्य जिस व्रिशांश में हो उन-उन त्रिशांशों का स्वामी जो ग्रह हो उसके गुणकी

अधिकता कहना 1

सूर्य, चन्द्र, गुर--सतोगुणी, शनि-मंगल--तमोगुणी और बुध-शुक्र--रजोगुणी Š t

(२) लग्नस्थ ग्रहों के अनुसार स्वभाव भी विचारना । -

(३) लग्न का बल ओर लग्न के साथ ग्रहों का योग या दृष्टि से प्रकृति विचारना b

शरीर--(१) लग्न में जो नवांश हो उसके स्वामी के अनुसार या उस समय सक

ग्रहों में जो बली हो उसके अनुसार ।

(२) उदित राशि और दूसरी राशियाँ जो सिर आदि कालपुरुष के अंग की सूचक हैं.

उनके अनुसार होगा ।

लग्नेश आदि से विचार--शरोर की आकुति स्वभाव, गुण, दोष, अवगुण अवस्था,

रस, पुरुष-स्त्री चेष्टा, अभ्यास और ग्राम आदि स्थिति का विचार लग्नेश के आक्नुति,

प्रकृति गुणादि के अनुसार एवं लग्त ग्रह के अनुसार विचारना ।

यहाँ कई प्रकार से बिचारन। बताया है जहाँ एक से अधिक प्रकार से कोई फल

प्रगट हो उपै ग्रहण करना ।

ग्रहों का स्वरूप जो शरोर रंग-रूप आदि विचारने में काम आता है

१ सूर्य- शूर, गंभोर, चतुर, रूपवान्‌ है पर साँवला, सिर में थोडे बाल, गोल शरीर, भिगर नेत्र, पित्त प्रकृति, ठिंगना, शरीर में बहुत हड्डी । मेष लग्न s| सूर्य--

द्रव्यवान्‌ परन्तु नेत्र रोगी । सिंह लग्न में रात्रि अंध । तुला में अंधा, दरिद्री, कर्क में

आंख š फूली । इनसे अन्य लग्न में-लड़ाई करने वाला, निर्दय, आलसी दरिद्री क

करके काम करने वाला हो । बट

है s.