सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 297, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंकालांग विचार : २८१
< और स्थूळ (a) लग्न पृथ्वी राशि लग्नेश जळ राशि हड्डी दृढ़, मध्यम स्थूल शरोर
(टो लग्न पृथ्वी राशि लग्नेश अग्नि व वायु राशि आन्तरिक बल होगा । हड्डी दृढ़ पर
शरीर स्थूल न होगा ।
७--शुष्क देह (कुश शरीर) के अन्य योग
(अ) लग्न में शुष्क ग्रह, (क) लग्न में निल राशि, (ख) लग्नेश निर्जल राशि में
या शुष्क ग्रह के साथ. (ग) लग्नेश त्रिक में या लग्नेश जहाँ है उस राशिका स्वामी
'त्रिक में हो, (घ) लग्नेश का नवांशेश शुष्क ग्रह के साथ, (ङ) लग्न निर्जेल पाप युक्त
या दृष्ट, (च) लग्नेश शुष्क ग्रह, या शुष्क ग्रह से. युक्त, शुष्क ग्रह के नवांश में या मिथुन
या सिंह राशि के नवांश में हो तो दुर्बल शरीर होगा, (छ) शनि व मंगल दुर्बल पन
उत्पन्न करता है । (ज) छग्नेश अष्टम में शुष्क राशि में हो तो दुबंळ होने के अतिरिक्त
क्लेशायुक्त शरीर रहे। (क्ष) शुष्क राशि में जन्म हो और वहाँ सब शुष्क ग्रह हों. तो
दुबला होने के अतिरिक्त स्वास्थ्य खराब होगा लगातार बीमारी दमा कब्ज बवासोर
आदि व्याचियाँ होंगी । (न) जन्म शुष्क लर्न में हो और उसका स्वामी गुरु या शुक्र के
साथ हो तो दुर्बल नहीं होगा ।
स्थूल शरोर होने के अन्य योग
(अ) लग्न जल राशि शुभग्रह युक्त या दृष्ट हो तो स्थूल शरीर होगा । (क) लग्नेश
जल ग्रह बढी हो शुभ ग्रह युक्त मी हो तो दृढ शरीर होगा (ख) लग्नेश जल ग्रह और
जळ राशि में शुभ ग्रह युवत या दृष्ट हो दृढ स्यूछ शरोर (ग) लग्ने बली हो जल ग्रह
हो अन्य जल ग्रह युक्त हो तो स्थुल शरीर, (घ) लग्न में शुम ग्रह की राशि, लग्नेश का
नवांसेश जलराशि में हो तो स्थूळ शरीर (ङ) लग्न में गुर या जळ राशिस्य गुरु की दृष्टि
हो या लग्न शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो असाधारण स्थूळ शरोर हो । (च) बुघ या चंद्र
केन्द्र में हो तो स्थूल शरीर हो । (छ) छग्नेश का नवांशेश जल राशि में हो लग्न शुभ
राशि में हो बुरे ग्रह की योग दृष्टि न हो तो शरीर पृष्ट होगा, (ज) जळ ग्रह चतुर्थं
स्थान में या जल राशि में हो तो अधिक बलवान् होगा (s) मोटा आदमो कोई दिखे तो
समझना गुरु या चन्द्र लग्न में होगा यदि उपरोक्त बलवानु योग में पाप दृष्टि हो तो
'पुष्टवा नष्ट हो जातो है ओर वह साधारण देह का हो जावा है । (ट) लग्नेश बलवान्
होकर शुभग्रह की राशि में हो तो शरीर पुष्ट होगा ।
लग्न के नवांशों द्वारा शरीर का विचार
(१) सूयं-साघारण मोटा ओर चिपटा ।
(२) चंद्र--उन्नत देह, सुन्दर नेत्र, कुछ कृष्ण वर्ण, सुन्दर केश 1
(३) मंगल- कुछ नाटा, नेत्र कुछ लाळ, दृढ़ शरीर ।
(७) बुष--मघ्यम उन्नत, ( मझोला कद ) नेत्रश्कोण छाल, शरीर को नसे निकलो
देखने पे ऊसछड़ । :