भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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कालांग विचार : २८३

हस्व दोघं अंग

हृस्व राशियां ( छोटी )--१, २, ११, १२ राशियाँ ।

सम (न छोटी न बड़ी )--३, ४, ९, १० राशियाँ 1

दीर्घं ( बडी )--५, ६, ७, ८ राशियाँ ।

हृस्व दीघं राशियों के अंग

राशि | मेष | वृष | मिथुन | ककं | सिंह | कन्या योग

: मीन | कुम |मकर | घन बुद्चिक | तुला |= १८०

अश २० २४ | २८ ३२ ३६ ¥o + १८० अंग ३६० अंध

z == सम दोघं हृस्व दीर्घ ग्रह | रवि वुघ शुक्र | मंगल शनि चंद्र

अंग सम == दीघं

१--काळ पुरुष के अंग के अनुसार ये राशियाँ लग्न से लेकर सिर से आरंभ कर

प्रत्येक अंग के छोटे बड़े होने का विचार करे ।

२--प्रह दीर्घ हो राशि में बैठा हो तो उस राशि का अंग दीर्घ होगा, हस्व से

हस्व, मध्यम से मध्यम अंग कहना 1

३--जिस अंग में राशि या राशिस्वामी दीर्घ हो वह अंग दीघ होगा, हस्व हो तो

'हस्व जानो ।

४--दो या अधिक ग्रह किसी अंग की राशि में पड़ें तो सब में जो बलवान्‌ होगा

उसीका प्रभाव अनुमान में आयेगा ।

५-_बहाँ कोई ग्रह न हो तो उसका स्वामी जैसी राशि में पड़े उस राशि से

विचारना ।

६--यदि वह स्वामी जल ग्रह से युक्त हो तो उस अंग में स्युलता विशेष रूप

से होगी ।

७--इसी प्रकार शुक्र ग्रह द्वारा युक्त या दुष्ट होने से कृशता या दुबंछता आयेगी ।

८--उपरोक्त बातों के विचार के लिये देखो--

(क) मंग निर्दिष्ट किस राशि का है । (ख) वहां यदि ग्रह है तो कैसा है यावह

किस राशि का स्वामी है। (ग) उस अंग राशि का स्वामी किस राशि में हे । (घ) अंग

राशि का या उसके स्वामी का कोई जल ग्रह से योग होता है या नहीं ।

अन्य योग सिर मुख रूप आदि के

(१) सिर--छग्न के हृस्व दोघे अनुसार छोटा बड़ा या मध्यम सिर होगा । (२) मुख एवं ख्प--

क--द्वितीय भाव काल पुरुष का मुख है वहाँ शुभ ग्रह हो तो रूपवान्‌ होगा 1

ख--द्वितीयेश केन्द्र में हो शुभ दृष्ट हो या द्वितीय में शुभ ग्रह हो तो सुन्दर

आकर्षक मुख होगा ।