सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 300, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२८४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
ग--ढितीयेश केन्द्र में उच्च में मित्र स्थानी या अपने वर्ग में हो यां. द्रितीयेश जिस
घर में हो उसका स्वामी गौपुरांश में हो तो उसका मुख पूर्ण होगा और. धनी होगा ।
घ--यदि पाप ग्रह दुसरे में हो या द्वितीयेश नीच में हो या पाप युक्त हो या पाप
दृष्ट हो तो वह कुरूप होगा ।
ङ--कोई कुरूप होते ë पर धनी भी होते हैं । दूसरा घर धन का भी Š । मुख को
'दिखावट को पहिले लग्नेश से विचारना पश्चात् द्वितीयेश से भी विचारना । जब दूसरा
घर अच्छे ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो बहुत धन होगा । परन्तु धन स्वामी (कारक) गुरु से
गिनने पर दुष्ट स्थान में हो तो मुख तो सुन्दर होगा परन्तु घन थोड़ा होगा ।
च--सुन्दरता या कुरूपता द्वितीय भाव, उसके स्वामो ओर द्वितोयेश जिस राशि पर
हो उसके स्वामी के शुभ प्रभाव पर निर्भर है ।
छ--मुख का अचानक कुरूप हो जाना शुभाशुभ ग्रहों को दशा अंतदंशा पर निभंर
ह । उपरोक्त बुरे ग्रहों की दशा में कुरूपता होतो है ।
ज- लग्न में शुभ हो तो सुरूप, पाप ग्रह हो तो कुरूप होगा ।
झ--द्वितीय भाव में बलवान् केतु हो तो लम्बा मुख हो या बड़ा मुख हो !
ब--पिछले बताये ३६ द्रेष्काण के अनुसार अंग विचार कर सिर के दाहिने या
आयें अंग में बुरे ग्रहों के प्रभाव से चोट आदि विचारना ।
छ
अध्याय--१३
भिन्न भिन्न राशि में ग्रहों का फळ
१- सूयं का राशि अनुसार फल
फल सम्वन्ध से भिन्न भिन्न मत हैं उनको भी लिख देना उचित होगा ।
(१) सूयं मेष में--साहसी, रुधिर व पित्त विकार से विकृत देह, भूस्वामी, बड़ा बुद्धिमान्, बड़ा साहसी, पर का सदा हितेच्छुक (मान सा०) (जा० भ०) । विख्यात,
चतुर, सर्वत्र फिरने वाला, थोड़ा घन, शस्त्र घारण से आजीविका, यदि सूर्य उच्चांश में हो तो उपरोक्त अल्पघन आदि फल नहों होंगे, अच्छा फळ होगा । सूयं मेष फे १०° तक परमोच्चांश में रहता है 1 शुमफल देता है । (qo जा०)
(२) सूयं वृष में-सुगन्धित द्रव्य, पुष्प शैया, सुन्दर वस्त्र, अनेक. पशुओं से अद्भुत सुख, जळ से डरने वाला, मित्रता करने वाळा, मनुष्यों को उनके योग्य हितकारक उप- देश करने वाळा, (मान सा०) (जा० भ०)। वस्त्र सुगन्धित द्रव्य ओर पापकम से आजीविका, स्वयो से द्वेष, गाने बजाने में चतुर, (qo जा०)
-(३) सूयं मिथुन मे--गणित शास्त्र की कळा जाने या अगणित शास्त्र जानते वाला, श्रेष्ठ शक्ति, मनोहर, अद्भुत वाणो बोलने में अग्रणी, विनययुक्त, सर्वत्र विख्यात, नीति