भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२० : ज्योतिष-दिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

भावों का शुभाशुभ विचार

भाव वृद्धि--जो भाव अपने स्वामी या शुभ ग्रह से य॒क्त-दुष्ट हो, जिस भाव का स्वामी युवा आदि शुभ अवस्था में हो उस भाव की वृद्धि समझो ।

भाव फल नाश--जिस भाव का स्वामी नष्ट, वृद्ध आदि अनिष्ट अवस्था में हो, अपने भाव को नहीं देखता हो, उस भाव का फल नाश समझो ।

भावों का विशेष विचार

(१) लग्न से नवम तथा सूर्य से नवम स्थान से भी पिता का विचार करना । (R) लग्न से १०-११ भाव में कहा हुआ सूर्य से १०-११ भाव में भी विचारना ।

(३) लग्न से ४,२,११ और ९ भाव में जिसका विचार बताया है वह चन्द्रमा से भी इन्हीं स्थानों के सम्बन्ध से विचारना ।

(४) लग्न से ३ भाव से जो विचार वताया हैं वह मंगल से तीसरे भावसे भी घिचारना । (५) लग्न से ६ भाव से जो विचार बताया है वह बुघ से षष्ठ भाव से भी विचारना 1 (६) गुरु से पंचम भाव से पुत्र और शुक्र से सप्तम भाव से स्त्री का और शत्ति से अष्टम भाव से मृत्यु आयु आदि का भी विचार करना ।

(७) इसी प्रकार जिस भाव से जो विचार कहा है वह उस भाष के स्वामी से भी बिचारना ।

भाव के कारक ०

भाव फारफ प्रह साच कारक प्रह (१) लग्न सूर्य (७) जाया शुक्र (२) घन ग्रु (८) शनि ८ T मृत्यु (३) सहज मंगल (९) घर्मं सूर्य और गुरु (४) सुहृद चन्द्र और बुघ (१०) कर्मं गुरु, सूर्य, बुघ, शनि -(५) सुत गुरु (११) लाभ गुरु (६) रिपु शनि और मंगल (१२) व्यय शनि मतसे

२ भौर ४ भाव का चन्द्र, ६ का मंगल, ९ का गुरु, १० का केवल बुध कारक है । अन्य भावों के कारक यहाँ बताये अनुसार हैं ।

संबंधियो के कारक ग्रह भाव वश से

(१) माता-चन्द्र से चतुथं भाव से (१) आत्म धारक--लग्न (२) पिता--रवि से नवमभाव से (२) स्त्री--घन भाव (३) आता--मंगल से तृतीय (३) कनिष्ठ भाई--सहज भाव (४) मामा- बुघ से षष्ठ (४) ज्येष्ठ भाई--लाभ भाव (५) पुत्र--गुरु से पंचम भाव से (५) पुत्र—पंचम भाव या पंचम (६) स्त्री- शुक्र से सप्तम भाव भाव में रहने वाला ग्रह भी कारक है । (७) मृत्यु-शनि से अष्टम भाव किस भाव में कौन ग्रह निष्फल है

(१) घन आव में--मंगल निष्फल š निष्फल (२) सुख में“-बुध निष्फल है ।. टु (५) यो ना bi । (३) घुत सं गुरु निष्फळ है ।