भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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3 SINEN

राशि एवं नक्षत्र-गुणधघमं : १९

राजकीय प्रयोजन, राजनैतिक शक्ति, आज्ञा प्रख्याति, मान्यता, मान ( आदर ),

सत्कार, कीति, पुरुषार्थ, प्रताप, उन्नति, दास-दासी का विचार, निग्रह अनुग्रह,

रोष, मानभंग कर्म (हाथ से होने वाले अच्छे बुरे कमं), कमं की प्रवृत्ति, काम जिसमें

रुचि होगी 1 यज्ञ, वापी, कूप, आदि शुभ कर्म का शुभत्व, पुण्य कर्म (अच्छे काम),

सब कर्मों की समीक्षा, बलिदान ( आत्म त्याग) वेद शास्त्रोक्‍त कमं, आगम,

प्रत्रज्या, शास्त्रज्ञान, मन को शक्ति, स्नायुक शक्ति, विज्ञान, कृषि, घामिक ज्ञान,

बुद्धि, वैद्य, शिल्प चातुर्य, रसवाद, सैनिक वाद, व्यापार, धामिक कायं आदि में

सफलता-विफलता, विद्या जनित यश, विद्या में परीक्षोत्तीर्ण, स्वधर्म, सत्यघर्म, पितृ

पक्ष के सुख का विचार पितृ द्रव्य और पिता का विचार, पैत्रिक ऋण, प्रवास

( परदेश जाना ) अर्थात्‌ देशान्तर जाना । विदेशी यात्रा का विचार, घन स्थिति

धन स्थान, भूषण, घोड़ा, वस्त्र, निद्रा वसन, भषण, निवास, ( रहने का स्थान ),

घुटना, मित्र शरीर, वर्षा अवषंण आदि व्योम का वृत्तान्त, दुष्ट या अदुष्ट का

निरूपण । यह पुष्ठ प्रदेश और जानु पर भ्रभावशाली है ।

(११) छाभ भाव--सब वस्तुओं के मिलने का विचार इससे होता है । सम्पूणं घन की

प्राप्ति भी इसी से विचारना 1 इच्छित द्रव्य आदि प्राप्ति का जरिया और द्रव्य का

लाभ, हाथी घोड़ा सुवर्ण वस्त्र भूषण रत्न आदि का लाभ या हानि, मांगलिक

श्यृंगार का द्रव्य, लाभ, धनोपाय, लाभ का उपाय, धन लाभ, ऐववर्ये, गुप्त-प्रगट

घन, मकान आदि लाभ, आंदोलिका, पूर्वाजित घनागम, आंनद, अर्थ, सेना, पालकी

कर्ण-भूषण, वांयां कर्ण, चतुष्पद, पाक विद्या, कौशल्य, हेम विद्या, राज्य सख,

मित्र परिवार और मित्र सुख, मित्र कैसे मिलेगें, आशा या इच्छा की पूर्ति,

से सफलता, विद्या प्राप्ति, परिवार, क्लेश, कुब्जता, परिब्रज्या, प्रवृत्ति, कन्या संतान,

पुत्रनाश, निःसंतान, ज्येष्ठ भाई या बहिन, छोटे भाई का बेटा, दोनों जांघ, वायां

हाथ, दाहिना पैर भी । इसका प्रभाव पिंडली ओर टखना पर होता है ।

(१२) व्यय भाव--इसमें व्यय अर्थात्‌ सब प्रकार के खर्च सम्बन्धी कार्य का विचार

होता है, घन व्यय; दुव्यंय, जलाशय, कूप, ावड़ी, तालाब, यज्ञ आदि में व्यय का

शुभाशुभ विचार, बुरे कर्म ( पाप कमं ), पतन, नीच कमं आदि का भी विचार |

उत्तम या नीच मागं से द्रव्य खर्च होगा इसका विचार, हानि, हेय विचार,

हीनता या कुरूपता, द्रारिद्रथ, अधिकार क्षय, शरीर नाश, पाप स्थान; बाहनमंग,

निद्राभंग, मनः पीड़ा, विभव और वित्त का क्षय होना, घेरना या पकड्ना, स्वर्ग

या नरक में गिरना, मानसिक चिता, शत्रु, गुप्त शत्रु, शत्रुओं का व्योहार,

द्वेष, विवाद, पीड़ा, पाखंड, हठ, हठ सम्बन्धी कायं, दंड, बंधन, राजदंड, कारागार निवास, दान सम्बन्धी कायं, दानशीलता, त्याग, भोग, कृषि कमं, शैयागृह, शयन

आदि सुख, अध्यात्म विद्या, गृप्त विद्या, मोक्ष, भ्रमण, परदेश गमन), पैतृक

सम्पत्ति का वाद, कनिष्ठ बहन का पुत्र, नेत्र, कणं आदि रोग, विशेष कर वाम

कर्ण और दोनों पैर का विचार |

इसका प्रभाव पांव ओर पांव को अंगुछियों पर होता हे ।