सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 362, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३४६ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड
अध्याय १६
फलित में ग्रहों के फल का विचार
फलित में ग्रहों के फळ का विचार १२ भाव का ३ प्रकार से होता है ।
(१) लग्न से भाव फल विचार (२) चन्द्र से भाव फल विचार और (३) सूर्य से
भाव फल विचार । यहाँ तीनों प्रकार का भाव फल विचारना दिया ë 1
भाव के साधारण नियम
भाव फल आदि विचारने को आरम्भ में ही संक्षिप्त स्थुल विचार किए हैं । उनको
मनन कर फल विचारना । यहाँ और भी संक्षिप्त में विचार देते हैं ।
१-माव, भावेश और भाव का कारक बलवान् होने से उस भाव सम्बन्धी अच्छा
फल होता है 1 यदि वह भाव या भावेश या उसका कारक निबॅल हों तो उस भाव
सम्बन्धी फल कम हो जाता है 1
२-यदि भाव बलवान् हो, उसका भावेश और कारक एक दूसरे के साथ हों या
एक दूसरे पर दृष्टि हो तो अच्छा फल द्रोता हैं ।
३-भावेश के साथ शुभ ग्रह उसके बल को बढ़ावेगा जैसे धनेश से साथ शुम ग्रह
गुरु हो तो घन देगा और घन बढ़ावेगा ।
सप्तमेश के साथ शुभ ग्रह शुक्र हो, जो विवाह का कारक भी है, तो वह विवाह की
संख्या या स्त्रियां बढ़ावेगा ।
४-किसी भाव में मंगल और शनि दोनों हों तो उस भाव का नाश करता है ।
५-चन्द्र सूयं के साथ हो । द्वितीय भाव में भोम, चतुथं में बुघ, पंचम में गुरु, षष्ठ
में शुक्र, सप्तम में शनि ये दोष युक्त होते हैं प्रायः निष्फ होते हुँ । यदि घन कारक
होने की स्थिति में हों तो तब भी निष्फळ होते हँ । घन लाभ नहीं होगा । इन भावों में
उपरोक्त ग्रहों के साथ चन्द्र भी हो तो चन्द्र भी निष्फळ होता है।
६-पाप ग्रह लग्न या किसी भाव के त्रिक (६-८-१२ भाव) में हो तो उस भाव
के फल को तीक्ष्ण करता है ।
७-्रिकेश किसी भाव से केन्द्र कोण में हों तो भी उस भावका अच्छा फल नहीं
देते । त्रिकेश उस भाव से त्रिक में हो तो अच्छा फल देते ë ।
८-जिस राशि में कोई ग्रह हो वह राशि व उसका स्वामी बली हो और वह
राशिस्थ ग्रह भो बली हो तो उस राशि या भाव का पूर्ण फल होता है यदि इनमें से २
बली हों तो मध्यम फल, केवळ एक बली हो तो हीन फल होता Š 1
९-कोई भावेश पाप युक्त उस भाव से त्रिकमें हो तो उस भाव सम्बन्धो सुख
नहीं देता ।
१०-कारक ग्रह या भावेश बहुत पाप ग्रहों से युक्त या दुष्ट हो या नोच आदि:
बुरे स्थानों में हो तो अच्छा फल नहीं देता ।