सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभिन्न-भिन्न भावों में ग्रहों का फल : ३४५
७-व्यय में शनि का फल
पंचायत का प्रधान, रोगी, हीनांग, अति दुःखी, जांघ में घाव, बड़ा क्रूर बुद्धि दुबंल अंग, पक्षियों को नित्य मारने बाला (मान०) ।
निर्लज्ज) दरिद्र, सन्तानहीन, अंग में दोष, मूख, शत्रुओं द्वारा भगाया हुआ (फल०) । दयाहीन, घनहीन, खच से दुःखी, सदा आलसो, नीच का संग, अंग-मंग से सौख्य (जा० भ०) ।
असत् म खर्च, कृतघ्न, द्रव्यहीन, भाइयों से वेर, कुवेष, चंचल (go चं०) सूरय
समान फल, पतित (go जा०) ।
तंगदस्त, बुरे आचरण, निर्घन, आलसी (खान०) ।
विकल बुद्धि, मूख, घनवान्, ठग (जा० पारि०)।
नीच कमं में मन, पापी, अंगहीन, भोग विलास की लालसा, दुष्टों से प्रीति
(जा० सं०) ।
<-व्यय में राहु का फल
धर्म अर्थ से रहित, अनेक दुःखों को भोगने वाला, स्त्रो होन, परदेशवासी, सुखहीन,
सुरे नख, बुरे वेष में रहना (मान०) 1
गुप्त पाप करने वाला, अधिक खर्च, पानी के रोग से पीड़ित (फल०) ।
नेत्रों का रोगी, पैरों में घाव, प्रपंच करने वाला, प्रीतियुक्त, दुष्ट जनों से प्रीति,
'अध्यम पुरुष की सेवा करता है (जा० भ०) ।
कलह प्रिय, बेकार, कर्जीला, गरीब, दुःखो (खान०) ।
शील रहित, सम्पत्तिवान्, विकल देह, साधु, पूर्व स्थित घन का नाशक (जा०
“पारि०) । नीच कर्म, अनर्थ में खच, पाप बुद्धि, कपट युक्त, कुछ का दोष देने वाला
(जा० सं०) ।
९-व्यय में केतु का फल
गुप्त रूप से पाप करे, बुरी वातों में घन खर्च, घन का नाशक, विरुद्ध गीत, नेत्र
“रोगी (फल०) ।
पेंडू लिंग गुदा चरण में पीडा, रोग से शरीर पीड़ित, मामा से किसी वस्तु को
श्राप्ति नहीं होती, राजा के समान भाग्यशालो, अच्छे कर्मो में व्यय करे, युद्ध में शत्रुओं
का नाशक (मान०) ।
पैर और नेत्रो में पीड़ा, राजा के तुल्य वेमव में खर्च करने वाला, शत्रु नाशक,
मन में सुखी नहीं, वस्ति और गुदा के रोग से पोड़ित (जा० भ०) ।
चञ्चल और शीळ रहित (जा० पारि०) ।