भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 384, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 384

३६८ : ज्योतिष-शिक्षा, qata खण्ड फलित

अध्याय १७

भावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल

(१) लग्नेश का फल भिन्न-भिन्न भावों में

१--लग्न मे-दोर्घायु, अतिबली, बहुत भूमि का स्वामी, भूमि लाभ ( मान० ) *

रोगहीन, दोर्घायु, बलवान्‌, दृढ़ शरीर, रूपवान्‌, प्रतिष्ठित ( जा० सं० ) ।

हृष्ट पुष्ट शरीर, पर क्रमी, मनस्वी, अति चंचळ, २ पत्नी या अन्य रखेल स्त्री

(<° पा० )!

२--दितीय में-बड़ा घनवान्‌, दीर्घायु, बडा वली, राजा या भूमि लाभकर्ता, श्रेष्ठ,

घमं रक्षा में मन ( मान० ) ।

घनी, बडी आयु, सामथ्यं, सत्कर्म परायण, स्थूळ, स्थान प्रधान ( जा० सं० ) ।

घनी, सुखी, सुशील, विद्वान्‌, बहुत स्त्री वाला ( वृ० पा०)।

३- तृतीय मे-बन्धुजनों और उत्तम मित्रों से युक्त, घर्म नाश करने में तत्पर, दानी

बूरवोर, बलवान्‌ ( मान० ) । :

अच्छे बांघवों व श्रेष्ठ मित्रो से युक्त, धर्मात्मा, दानी, शूरवीर, वली (siro सं०) 1

सिह के समान पराक्रमी, सब सम्पत्ति से युक्त, सानी, दो स्त्रियों वाला, बुद्धिमान्‌

और सुखी ( qo पा० ) ।

४--चतुर्थ॑ में-राजा का प्रेमी, बड़ी भारी जीविका करने वाला, far Sen,

माता पिता का मक्त, अल्प भोजी ( मान० ) । 3

राजा का प्रिय, बड़ो आयु वाला, लाभ वाला, बहुत स्त्रियों Š युवत, माता पिता का

भक्त ( जा० सं० ) ।

माता पिता से सुख पाने वाळा, बहुत भाई वाला, कामी, गुण और रूप युषत

( बृ० पा० ) । ५---पंचम में-देव पितू पूजक, सुन्दर पुत्र, स्वतः दान शीळ, घनो, संग्राम में प्रसि

दीर्घायु, मान करने योग्य, अच्छे कमं । ( मान० ) 1

पुत्र बाला, दानी, समर्थ, विख्यात, दीर्घायु, अच्छा शीळ, सत्कमं ( जा० सं० )

पुत्र का सुख मध्यम, ज्येष्ठ संतान का नाश, मानी, क्रोधी, राजा का प्रिय ( 4°

जा०) ।

६--षष्ठ में-रोगहोन, भूमि लाम, बलवान्‌, कृपण, -घनाढय, शत्रुनाशक, सदा-

चारी, अच्छे कमं ( मान० ) ( जा० सं० ) ।

देह सुख से हीन, पापयुक्त । शुभग्रह से दुष्ट न हो तो शत्रु से दुःखी रहता हैं (बृ पा० ) । ७--सप्तम में छग्नेश-तेजस्वी, शोक करने वाला, स्त्री शीलवतो, प्रज्वलित तेज

वालो ओर रूपवती ( मा० ) ( जा० ) ।