सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभावेरा का भिन्न-भिन्त भावों में फल : ३६९
यदि यह पाप ग्रह हो तो उसकी स्त्री का नाश । शुमग्रद हो तो सण करने वाळा
दरिद्री, विरागी राजा होता है ( जा० पा० )!
<--अष्टम म लग्नश-कृपण, धन संग्रहकर्त्ता, दोर्घाय 1 लरनेदा पापग्रड हो ठो काना |
शुभ ग्रह हो तो सुन्दर रूप वाला हो ( मा०) 1
पाप ग्रह हो तो क्रूर स्वभाव, शुभ ग्रह हो तो सोम्य स्वनाव ( करार = |
सिद्ध विद्या जानने वाला, रोगी, चोर, क्रोबी, जुआड़ी, परस्तरीगाम | ३० == 0१
६--नवम में छग्नेश-बहुत भाई qeq , पुण्य कर्मा, सद का मित्र, सुझोल, प्छिद
विख्यात, बड़ा तेजस्वी ( मान० ) (जा० सं० ) 1
भाग्यवान्, लोगों का प्रिय, विष्णु का भक्त, चतुर वक्ता, स्त्रो पुत्र ओर घन Z= ( वृ० पा० )।
१०--दशम में-राजा से लाभ, बड़ा पण्डित, सुशील, गुरु माता पिता का पूजक,
राजाओं में प्रसिद्ध ( मान० ) 1
राजा का मित्र, पण्डित, सुशील, गुरुमाताओ का पूजक, राज समृद्ध पुरुष
(जा० सं० )। :
पिता से सुख पाने वाला, राज्यमान्य, विख्यात, अपने भुजवल से घनोपाजंब
(वृ० पा० )।
११--लाम में लग्नेश-सुख पूर्वक जीवन, पुत्र से युक्त, तेज युक्त, बलदान्, घोड़ा
हाथी आदि वाहनों से युक्त ( मान० ) 1
दीर्घजीवी, पुत्रवान्, विख्यात, तेज सम्पन्न हो तो ये फल, बल हीन हो तो-ये फरक
नहीं होते ( जा० सं० ) ।
लाभ करने वाला, सुशील, विख्यात यश, उदार, गुणों से युक्त ( qo पा० )।
१२--व्यय में लग्नेश-दुष्कमं कर्ता, महापापी, नीच, सहगोत्रजनों के साथ मान
करने वाला, विदेश वासी, कंगाल मनुष्यों को भात देने वाला ( मान० ) ।
चतुर वाणी, कर्ण रहित, गोत्रजनो के साथ मेल न रखने वाला, विदेशी भोर घन
भोक्ता ( जा० सं० )।
देह सुख से हीन, व्यथं खच, महाक्रोधी, यदि शुभ ग्रह का योग या दृष्टि न हो ।
शुभग्रह के योग या दृष्टि से अशुभ फल अल्प होता है ( वृ० पा० )।
लग्नेश का विशेष फल
१-लग्नेश से सौभाग्य का विचार करना ।
२-लम्नेश बली हो तो सोभाग्य सम्पन्न हो, शरोर बलिष्ठ हो । लग्नेश बलो'हो शुभग्रह से
युक्त या दृष्ट हो--स्वास्थ ठोक रहे, लग्नेश बली अर्थात् अच्छे स्थान में, अच्छी स्थिति
में अच्छी दृष्टि युक्त या शुभ qaa भे हो तो महत्व का होता है ।
मनुष्य फे जीवन के सुख का विचार करते को लग्ेक्ष फा बल देखना चाहिए ।
३--ऊग्नेश बलहीन हो उसमें पाप प्रह हो-तो शरोर रोग से पीड़ित रहे ।
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