भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३७१

१९--छग्नेश जिस भाव में हो उसका स्वामी दुष्ट स्थान में हो--तो देह दुवंरू रहे और रोगी <ë (go चि०) ।

ऐसे ही अन्य भावेश के सम्बन्ध से विचारना । अर्थात्‌ जिस भाव का स्वामी दुष्ट स्थान में हो उस भाव का फल नाश हो (स० चि०) ।

२०--लग्नेश पापग्रह हो या चन्द्रमा लग्न में हो या दोनों योग हो तो--अति रोगी हो

१-छग्नेश अस्त शत्रुगृही या नोच में हो--रोग कारक (qo पा०) ।

२२--लग्नेश पापयुक्त-शरीर सुख नष्ट ।

२३--लग्नेश अष्टमं हो तो भी उपरोक्त फल होगा परन्तु शुभग्रह की दृष्टि हो तो

चैसा नहीं होता कुछ शुभ भी होता है (स० चि०) ।

२४--लग्नेश पापयुक्त हो और लग्न में राहु हो-ठग चोरों का भय हो 1

२५---लग्नेश शनि युक्त व दृष्ट हो-तो निश्चय ठग चोर या राजा से भय ।

२६--अष्टम में लग्नेश राहु या केतु युक्त-उपरोक्त फल ।

२७--छग्नेश जिस राशि के जिस अंश में हो उसका स्वामी यदि राहु मंगळ केखु .

शनि से युक्त हो-तो उपरोक्त फल ।

२८--लग्नेश मंगल लग्न में पापयुक्त या दृष्ट-पत्यर फी चोट से या खञ्ज आदि से न्नुण (qo चिं०) ।

२९-<-लग्नेश निवंल ग्रहयुक्त या निर्बल ग्रह के घर में-देह दुर्वळ हो ।

३०--लग्नेश निर्बल होकर अष्टम में तथा लग्न में निर्बल: राशि हो-खरीर

दुबला कष्ट युक्त रहे (qo चि०)

३१--लग्नेश जिस “ग्रह के राणि अंश में हो वह निर्बल राशि हो या स्वयं

निबंल हो तो-शरीर सूखा <ë (स० चि०)।

३२-छग्नेश जल ग्रह हो और वली हो शुभ ग्रह युक्त हो तो-स्थूळ शरीर हो ।

३३--ळग्तेश जल राशि में हो शुभ ग्रह युक्त हो जल ग्रह की उस पर दृष्टि हो

सो-स्यूल शरीर हो ।

३४--लरनेश जिस राशि के अंशक में हो उसका स्वामी जल राशि में हो wm में

शुभ ग्रह की राशि हो तो-उपरोक्त फल (qo चि ०) ।

३५--लग्नेश बलवान्‌ हो, सूर्य देवलोकांश में हो, भाग्येश उच्च राशि में हो तो-

बहुत माध्यवान्‌, कोतिमान्‌ हो 1

३६--लग्नेश बलवान्‌ शुभ वर्ग में हो या स्वनवांश में शुभ ग्रह युक्त हो, केन्द्रेश

=s के साथ हो तो-उत्तम भाग्य कीति हो घन, अन्न की बढ़ती हो (go चि०) । _

३७--लग्नेश बलहीन होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो तो-बुरा स्वास्थ्य रहे

(go चि०) ।

३८--लगन में मांदि (गुलिक) हो और लग्नेश नीच में हो तो-५६ वर्ष में पुत्र

शोक हो (qe पा०) 1

RC. Ç