सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 394, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३७८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
वाला, भाई बंदों से दूर भागने पर बहुत काल तक परदेश में रहने वाला (मान०) t
स्त्रियों से विरोध करने वाला, अच्छे वांघवो से विरोध वर्ता, संतापकर्ता, दूर के बसाये
हुए बंधु वाला, विदेश गामी (जा० सं०) । कुकाय॑ में खर्च करने वाला, उसका पिता
क्र होता ë तथा पत्नी द्वारा भाग्योदय होता है। (go पा०) 1
३--तृतीयेश का विशेष फल
१--सहोदर सुख-तृतीयेशञ या मंगल तीसरे भाव को देखता हो या उसमें हो तो
सहोदरों का सुख हो (वु० पा०) ।
२--सहोदर नाश-तृतीयेश और मंगल दोनों पाप युक्त पाप राशि में हो तो सहोदरों
का नाश (qo पा०) 1
३--वंधुनो से होन-तृतीयेश q मंगल व दोनों लग्न से त्रिक में हो (जा० लकार) ।
४--बंघुमो वाला-तृतोयेश स्वस्थानी होकर शुभग्रहों से दृष्ट हो (जा० सं०) ।
५--बंघुओं से बहुत सूख-तृतीयेश शुभग्रह युक्त केन्द्र में हो (जा० लं०)। |
६--बंधुनो से सुख नहीं-तृतीयेश पापयुक्त या दृष्ट होकर केन्द्र में ।
७--सहोदर सुख-तृतीयेश और मंगल दोनों केन्द्र या कोण में हो या अपने उच्च
या मित्र गृह में हो (qo पा०) ।
<--छोटे सहोदरों का अभाव, बड़े ३ सहोदर-भ्रातू कारक ग्रह राहु से युक्त हो
और तृतीयेश नीच में हो तो छोटे सहोदरों का अभाव और बड़े ३ सहोदर समझना
(ुण्पा०)। `
९--१२ सहोदर-तृतीयेश केन्द्र में हो और भ्रातृ कारक ग्रह उसके त्रिकोण में यदि
गुरु के साथ उच्च में हो तो १२ सहोदर हों उसमें जातक बड़े २ और तीसरा सातवां
नवां और बारहवां ये अत्पायु होंगे शेष ६ सहोदर दीर्घायु होते हैं ।
१०--शूर धैयंवान् साहसी आदि--तृतीयेश और लग्नेश एक दूसरे के स्थान में हों
शौर बलवान् हों तो जातक श्र, धेयंवान्, अपने भाइयों का सहायक, और साहसी होता
है (फल०) ।
११-भाइयों की उन्नात-तृतीयेश बळी हो शुभग्रह से युक्त हो और उस भाव का
कारक भी शुभ घर में हो--तो भाइयों की उन्नति हो । भाइयों की हानि-यदि बलहीन
हो और बुरी स्थिति में हो तो भाइयों की हानि हो ।
१२--भाई संस्या-तृतीयेश और कारक दोनों विषम राशि में हों गुरु सूय और मंगर की दृष्टि हो और तीसरे घर मे विषम राशि हो तो नवांश से जितना मालूम हो उतने भाई होंगे ।
१३--बहिन या भाई तृतीयेश स्त्रीग्रह हो, या तृतीय में स्त्रीग्रह हो तो-बहिन
होगी तृतीयेश पुरुष ग्रह हो, या तृतीय में पुरष ग्रह हो तो-भाई होगा । स्त्री ओर पुरुष अहोंका मिश्रण हो तो भाई बहन दोनों हों इसमें बल अबल दृष्टि आदि का भी विचार
करना।