भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३७७

जनों का पूजक, शुभाचार, राजा से लाम (जा० सं०) 1 सहोदर से सुखी, घन पुत्र से

युक्त, अधिक सुख भोगी (qo पा०) ।

४चुर्थ में तृतोयेश-पिता तथा भाई बंदों के साय सुख भोगने वाला, माता के

साथ वेर करने वाला, पिता के घन का नाशक (मान०) । पिता को आनन्द और सुख￾कर्ता । माता पिता का उदय कर्ता। माता के साथ वर, पिता का बन भक्षण करने वाला (जा० सं०) । सुखी घनी, बुद्धिमान्‌, दुष्ट स्त्री का पति (वृ० पा०) 1

५--पंचम में तृतोयेश-पुत्र, भाई बंदों के पुत्र ओर सहोदार द्वारा पालन करने

लायक, दीर्घायु, परोपकार में बुद्धि (मान०) । अच्छे बांववों बाला, सहोदर त्राताओ

से पाला जाने वाला, बड़ी आयु वालः, पर जनों का उपकार कर्ता (जा० सं०) । पुत्रबान्‌

गुणी, यदि पापयुक्त हो तो दुष्ट स्त्रो का पति हो (qo पा०) |

६--षष्ठ में तृतीयेश-भाई बंधुओं का विरोधी, नेत्र का रोगो, अकस्मात्‌ मुमि

राभ, रोग व्याप्त (मान०) (जा० áo) 1 भाई से शत्रुता करने वाला, बड़ा बनी,

मामा से शत्रुता और पापो से प्रेम करने वाला (वृ०.पा०) ।

७--पप्तम में तृतीये थ-सुशोला, सोमाग्यवतो स्त्रो हो, कूर ग्रह हो तो देवर के

घर में रहने बाली हो (मान०) 1 राजा का सेवक, वास्यावस्या में दुःखी, अंत में

सुखी (बृ० पा०) 1 ८--अष्टम में तृतीयेश-भाई मरे । यदि पापग्रह हो तो बांह को पीडा से दुःखो,

८ वषं जीवे (मान०) । मरे हुए सदाहर भ्राताओं वाला । पापग्रह हो तो ८ वर्ष दक

जी सके तो भुजा से होन अंग वाला हा (जा० सं०) । चोर, नोकरो करने वाला,

राजा के द्वारा मरण पाने वाला (qo पा०) ।

९---नवम में तुतीयेश--माई बंदों से होन। शुभग्रह हो-बांवव जन सज्जन हों

स्वयं विद्वान्‌ और सहोदर भाई का भक्त (मान०) । पुण्यवान्‌, सगे भाई से स्नेद करने

बाला, बांघवों से पराजित होता है । शुमग्रह हा-अच्छे वांधवों से युक्त अच्छे कायं करने

चाला, अआताओं का भक्त (जा० सं०) । पिता के gq से होन, स्तो के दारा भाग्योदय,

पुत्रादि से युक्त (qo पा०) ।

१०--दशम में तृतीयेश-राजाओं का पुज्य, भाता पिता भाई बंबुओं का मक्त,

उत्तम बुढि, सब बंघुओं से मेल (मान०) । राजा से सत्कार पाने वाला, बांबवो का

भक्त, उत्तम बांघव जनों से मान्य, अच्छे निश्‍चय वाला (जा० सं०)। सब प्रहार से

सुखो, अपने पराक्रम से घन कमाये, दुष्ट स्त्रियों को पालने बाला (वृ० पाऽ) 1

११--छाम में तृतीयेश-सत्पात्र, बांधवों से युक्त, किसी राजा के द्वारा शोमा पाने

वाला, भाई बंदों का सेवक, मोग विलास युक्त (मान०) 1 अच्छे ahaqi से युक्त, बांघवों

से पूज्य, सेवा चाहने बाला, भोगवान्‌ (जा० सं०) व्यापार में बनी, विद्याहोन भी

बुद्धिमान्‌, साहसो ओर दूसरों को सेवा करने याला (बुर पाऽ)

१२--व्यय में तृतीयेश-मिन्रों से विरोध करने बाला, आई बंदों को संताप देने