सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 398, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३८२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
१४--उल्टा फल-चतुर्थश अस्त हो तो चतुर्थेश का सव फळ उल्टा हो (जा०सं०)।
१५--सुखकारी-चतुर्थेश शुभ युक्त या दृष्ट होकर बलवान् हो तो सुखकारी है 1
१६- मित्र हानि-चतुर्थेश शुक्र बुत्र मंगल से दृष्ट हो (जा० So) 1
१७--माता को क्लेश--चतुर्थेश पाप युक्त हो ।
१८--माता को शुभ-चतुर्थेश शुभ युक्त हो ।
१९- श्वसुर, मित्र पिता का शरीर सुख-चतुर्थश के समान, शवसुर, मित्र और
पिता का शरीर सुख का विचार करना (जा० सं०) ।
२०--गृह भूमि वाहन खेती माता आदि का सुख-चतुर्थेश स्वगृह, स्वनवांश,
सर्वोच्च में हो तो गृह भूमि, वाहन, खेती, माता, वाजा आदि का पूर्ण सुख
हो (बृ० पा०) ।
२१--उच्च श्रेणो का घर-चतुर्थंश यदि दशमेश के साथ केन्द्र त्रिकोण में हो तो
उच्च श्रेणी का मकान हो (go पा०) । -
qq—= में मान्य-चतुर्थेश शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रह से युक्त हो लग्न में बुथ
हो तो वन्धुओं में श्रेष्ठ मान्य होता है (वृ० पा०)
२३--माता का पूर्ण सुख-चतुर्थेश और शुक्र केन्द्र में हो उच्च का बुध हो ।
२४--बाहन सुख-लामेश चतुथं में चतुथँश लाभ में हो तो १२ वर्ष में वाहनों का
ख हो। ;
: २५--वाहन लाभ-चतुर्थश यदि दशमेश युक्त होकर अपने उच्चांश में होतो
४२ वर्ष में याहनों का विशेष लाभ हो (qo पा०) ।
२६--वाहन लाभ--चतुर्थेश उच्च में शुक्र युक्त हो चतुर्थ में सूर्य हो तो ३२ वर्ष में
वाहन का विशेष लाभ हो (go पा०) ।
२७--गूगा-चतुर्थ में चर राशि हो चतुर्थेश ओर मंगळ ६, १२ भाव में हो वो
बह गुंगा हो (qo पा०) ।
२८--माता को मृत्यु-जन्म में चतुर्थंश और चन्द्र दुःस्थान में हो शुभ ग्रह का योग
दृष्टि न हो या दो पाप ग्रहों के वीच में हो और पाप दृष्टि भो हो तो माता की मृत्यु हो (फल दी०) 1
२९--माता का सुख-यदि उपरोक्त दोनों ग्रह बली हों और चतुर्थ शुभ युक्त या
दुष्ट हो तो माता का सुख होगा (फल दी०) । :
३०--माता की दाह क्रिया करे-चतुर्थंश लग्न में हो और लग्नेश चतुर्थ में हो
और दोनों में कोई चन्द्र से युक्त या दृष्ट हो तो जातक माता की दाह क्रिया करेगा ।
३१--माता का दाह संस्कार न कर सकेगा-यदि वे दोनों ग्रह एक दूसरे के शत्रु
या नीच घर या ६, ८ भाव में दों और एक दूसरे से किसी प्रकार सम्बन्धित न हों
सहयोग से या दृष्टि से, तो माता की मृत्यु पर उसका दाह संस्कार न कर
सकेगा (फल०) ।
२--पिता पुत्र आदि के विषय में बिशेष विचार-जैसा कि ऊपर माता के लिये