भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३८२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

१४--उल्टा फल-चतुर्थश अस्त हो तो चतुर्थेश का सव फळ उल्टा हो (जा०सं०)।

१५--सुखकारी-चतुर्थेश शुभ युक्त या दृष्ट होकर बलवान्‌ हो तो सुखकारी है 1

१६- मित्र हानि-चतुर्थेश शुक्र बुत्र मंगल से दृष्ट हो (जा० So) 1

१७--माता को क्लेश--चतुर्थेश पाप युक्त हो ।

१८--माता को शुभ-चतुर्थेश शुभ युक्त हो ।

१९- श्वसुर, मित्र पिता का शरीर सुख-चतुर्थश के समान, शवसुर, मित्र और

पिता का शरीर सुख का विचार करना (जा० सं०) ।

२०--गृह भूमि वाहन खेती माता आदि का सुख-चतुर्थेश स्वगृह, स्वनवांश,

सर्वोच्च में हो तो गृह भूमि, वाहन, खेती, माता, वाजा आदि का पूर्ण सुख

हो (बृ० पा०) ।

२१--उच्च श्रेणो का घर-चतुर्थंश यदि दशमेश के साथ केन्द्र त्रिकोण में हो तो

उच्च श्रेणी का मकान हो (go पा०) । -

qq—= में मान्य-चतुर्थेश शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रह से युक्त हो लग्न में बुथ

हो तो वन्धुओं में श्रेष्ठ मान्य होता है (वृ० पा०)

२३--माता का पूर्ण सुख-चतुर्थेश और शुक्र केन्द्र में हो उच्च का बुध हो ।

२४--बाहन सुख-लामेश चतुथं में चतुथँश लाभ में हो तो १२ वर्ष में वाहनों का

ख हो। ;

: २५--वाहन लाभ-चतुर्थश यदि दशमेश युक्त होकर अपने उच्चांश में होतो

४२ वर्ष में याहनों का विशेष लाभ हो (qo पा०) ।

२६--वाहन लाभ--चतुर्थेश उच्च में शुक्र युक्त हो चतुर्थ में सूर्य हो तो ३२ वर्ष में

वाहन का विशेष लाभ हो (go पा०) ।

२७--गूगा-चतुर्थ में चर राशि हो चतुर्थेश ओर मंगळ ६, १२ भाव में हो वो

बह गुंगा हो (qo पा०) ।

२८--माता को मृत्यु-जन्म में चतुर्थंश और चन्द्र दुःस्थान में हो शुभ ग्रह का योग

दृष्टि न हो या दो पाप ग्रहों के वीच में हो और पाप दृष्टि भो हो तो माता की मृत्यु हो (फल दी०) 1

२९--माता का सुख-यदि उपरोक्त दोनों ग्रह बली हों और चतुर्थ शुभ युक्त या

दुष्ट हो तो माता का सुख होगा (फल दी०) । :

३०--माता की दाह क्रिया करे-चतुर्थंश लग्न में हो और लग्नेश चतुर्थ में हो

और दोनों में कोई चन्द्र से युक्त या दृष्ट हो तो जातक माता की दाह क्रिया करेगा ।

३१--माता का दाह संस्कार न कर सकेगा-यदि वे दोनों ग्रह एक दूसरे के शत्रु

या नीच घर या ६, ८ भाव में दों और एक दूसरे से किसी प्रकार सम्बन्धित न हों

सहयोग से या दृष्टि से, तो माता की मृत्यु पर उसका दाह संस्कार न कर

सकेगा (फल०) ।

२--पिता पुत्र आदि के विषय में बिशेष विचार-जैसा कि ऊपर माता के लिये