भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भावेश का भिन्न-मिन्न भावों में फल : ३८३

कहा गया है उसी प्रकार पिता, भाई, पुत्र, आदि के विषय में, उसके सम्बन्धित भाव

का सम्बन्धित कारक, उसके स्वामी, लग्न लग्नेश के सम्वन्ध से विचार कर फळ कहना (फल०) ।

३३--मान वाहन, आधिपत्य आभूषण आदि प्राप्त-चतुर्थेश और शुक्र यदि लग्न में और चतुर्थ भाव में मुस्थित हो तो मान के लिये वाहन, मनुष्यों पर आधिपत्य, सुवणं

और भी दूसरे कीमती मणि आभूषण वस्त्र, शैया और इसी प्रकार के भोग को आवश्यक

सामग्री प्राप्त हो हाथी घोड़े गाय आदि मिले (फल०)

३४--घर जले-चतुर्थेश दुःस्यान में हो या चतुर्थ में मंगल और शनि हो तो उसका

घर जळ जावे (फल०) ।

३५--घर मिळे-चतुर्थेंश चतुर्थ में हो या चतुर्थ में लरनेश हो तो घर मिछे।

यदि वे दुःस्यान में हों तो विपरीत फल हो ।

३६--घर मिले--चतुर्थेश सप्तमेश से युक्त होकर चतुथं में हो या केन्द्र या कोण

में हो या अपने उच्च का होकर सप्तम को देखे तो घर की प्राप्ति हो ।

३७--चतुर्थेश का नवांश अनुसार फल--चतुर्थेश स्वगृहो हो या अन्य ठिकाने हो वह

जिस ग्रह के नवांश में हो वह ग्रह अपनी स्थिति प्रमाण से फळ देता है। मां का स्वभाव

भी उसी ग्रह प्रमाण से रहता है (प्रा० यो०) ।

३८--राशि जिनमें चतुथँश शुभ द्वोता है-क्रेवर ६ राशियाँ है जिनमें चतुर्थेश शुभ

(होता है वे कुम्भ, मीन, मिथुन, ककं, कन्या और घन लग्न हँ । इनसे से चोथे घर में

शुभ ग्रह का घर पड़ता है । शेष राशि की लग्न होने से; चतुर्थ में पाप प्रह को राशि

पड़ती है 1 कर्क के लिये जव चंद्रमा पूणं हो तो शुभ हैं निर्बल हो तो पाप प्रह होतो

है। इसी प्रकार मिथुन कन्या के विषय में है जव उस का स्वामी बुघ शुम युक्त हो तो

` शुभ है । पाप युक्त हो तो पाप गिना जाता है । परन्तु यहाँ इसका विचार न कर मियुन

और कन्या को शुभ राशि गिना है ।

(३९) चतुर्थं में बली चतुर्थश ग्रह का फल

चतुर्थेश सूर्य हो तो उसका गृह अदृढ ओर विशेषकर जा हुआ होता है । चन्द्र ह!

तो उसका गृह नवीन होता है । मंगल हो तो उसका गृह टूटा हुआ तया जला हुआ,

बुघ.हो तो उसका गृह चित्र विचित्र प्रकार का, गुरु हो तों उसका qg अच्छा मजबुत

दृढ़, शुक्र हो तो उसका गृह मनोहर, शनि हो तो उसका गृह पुराना होता हे

( जा० सं० )।

(४० ) चतुर्थेश का धन भाव में विशेष फल

चतुर्थेश चन्द्र घन में--दहो शक्कर आदि मोठे पदार्थ मिळे चांदी का पात्र पीने

को हो, मांस मछली आदि का खाने वाळा हो । सूर्य घन में-खारा व उष्ण पदार्थ प्राप्त

हा तांबे का पात्र हो बकरे का मांस भक्षो हो । मंगळ घन में-खारा, तिलह, मशालेशर

पदार्थ मिले हरिण या पक्षी का मांस प्रिय हो, रांगा या कलई वाछा पात्र हो न्याय