भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३८४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

करने कौ विधि व लड़ाई करने की विद्या प्राप्त हो। लाल नेत्र, क्रूर व कठोर वचन

बोलने वाला हो । बुध घन में हो--सात्विक अन्न प्राप्त हो कांसे का पात्र प्रिय हो.

(प्रा यो० ) ।

५--पंचमेश का भिन्न भिन्न भाव में फल

१--लग्न में पंचमेश--संसार में प्रसिद्ध, थोड़े पुत्र, शास्त्र जानने वाला, देववेत्ता,

सत्कर्म में निरत (मान०) | विख्यात बहुत से पुत्रों से युक्त, शास्त्रवेत्ता, शीलवेत्ता, सुकर्म

में सावघान | जा० सं० ) । पुत्र सुखयुक्त, बिद्वान्‌, वद्य, कुटिल हृदय, परधन हारक

( वृ० पा० ) ।

२--घन में पंचमेश --क्रर ग्रह हो-दरिद्र, शुभग्रह--गाने बजाने आदि कला का

ज्ञाता । नौकरी आदि के लिए अच्छी जगह होने पर भी कठिनता से भोजन चलाने वाला

( मान० ) । पापग्रह हो--घनहीन, गाना बजाना आदि जाने, कविता करने में चतुर,

कष्ट भोगी, स्थानाधिक हो ( जा० सं० ) । बहुत पुत्र और घन से युक्त, परिवार का

पोषक, मानी, स्त्री का प्रिय, यशस्वो ( व० पा० ) 1

३--तृतीय में पंचमेश-मनोहर मीठी बातें कहने वाळा, सब वस्तुओं में प्रसिद्ध,

उसका पुत्र सारे कुटुम्ब का पालन पोषण करे ( मान० ) 1 मधुर भाषी, अच्छे बन्धुजनं

से विख्यात । उसके पुत्रों तथा बांघवों को पुत्री पालतो है ( जा० सं० ) । सहोदर का.

प्रिय, चुगुलखोर, कंजूस स्वार्थी (वृ ० पा०) ।

४- चतुर्थ में पंचमेश-पिता के समान कमं करने में उद्यत, पिता द्वारा अधिक समय

तक पाला जाय, माता की सेवा करने वाबा । क्रूर ग्रह हो पिता का विरोधी (मान०) ।

गुरु भक्त, पिता के कायं में युक्त, माता का भक्त । पापग्रह हो तो विपरीत फर हो

( जा० सं० ) सुख युक्त, माता पिता से भी सुखी, घनवान्‌, बुद्धिमाद्‌, राजमंत्री या

राजगुरु (बृ० पा०)।

५--पंचम में पंचमेश-बुद्धिमान्‌, मनुष्यों में माननीय, पुत्रों से युक्त, एवं प्रसिद्ध

(मान०) । बुद्धिमान्‌, मानी, कहने में प्रवीण, पुत्रयुक्त, बहुत धन से सम्पन्न, ख्याति युक्त

( जा० सं० ) । शुभग्रह युक्त हो तो पुत्रवान्‌ । पापयुक्त हो तो संतान होन किन्तु गुणी

और मित्र का उपकारी होता है ( वृ० पा० )।

. ६- षष्ठ में पंचमेश-क्रर ग्रह हो-सदा शात्रुओ से आक्रान्त, मान से हीन, बंघन

से रहित ( मान० ) शास्त्र प्रिय, पुत्रहीन, रोगी और निर्धनी । पापग्रह हो तो अतीव

दुष्ट हो ( जा० सं० ) । पुत्र से शत्रुता या पुत्रहीन या दत्तक पुत्र वाला (वृ० पा०) ।

७-सप्तम में पंचमेश-मनुष्य देव गुरुजनों का भक्त, पुत्रों से युक्त, स्त्री प्रियभाषिणी

और सुशीला ( मान० ) स्त्रो सुन्दर संतान वाली, सोभाग्य युक्त, भाग्यवती, गुरुभक्त

प्रिय बोलने वाली अच्छे शील वाली (जा० सं०)। मानी, सब घर्म को मानने वाला,

पुत्रादि सुख युक्त) परोपकारी ( qo पा० ) ।

८ अष्टम में पंचमेश-दुर्वावय कहने वाला, स्त्री से रहित, भाई तथा पुत्र असह्य

| बातें कहते हैं ( मान० ) । बुरे वचन बोलने वाला, स्थानहीन, मू, उसके भाता व