सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३८५
पुत्र नष्ट, अंगहीन ( जा० qo
हीन (qo पा० ) ।
९--नवम में पंचमेश-विद्या में सुबोध, बड़ा कवि, गान विद्या का जानने वाला राजाओं से पूजित, रूपवान्, नाटक विद्या का प्रेमी ( मान० ) । सुन्दर गान विद्या से युक्त, गान में निपुण, राजा से सत्कार पानेवाला, सुन्दर रूप नाटक रसिक (जा० सं०)। ea पुत्र अ या राजा के तुल्य हा, स्वयं ग्रथक्रार, विख्यात, कुल में श्रेष्ठ वृ० पा०) ।
) । थोड़े पुत्र वाला, कास इवास से युक्त, क्रोधी, सुख१०--ददाम में पंचमेश-राजा के समान कर्म करने व विचारने वाला, सत्कर्म में निरत, सबों में उत्तम, माता को आनन्द देने वाला ( मान० )। राज काज करने
वाला, राजपृरुषों से सेवित, सत्कमं में निपुण और श्रेष्ठ, माता के लिए सुख का भोगने वाला ( जा० सं० ) 1 राजा, अनेक सुख से युक्त, विख्यात कीति ( qo पा० ) ।
“११--जछाभ में पंचमेश-शूरवोर, पुत्रवान्, गाने बजाने को कला का ज्ञाता, राजा
के समान भोगी ( मान० ) शुरवीर, पुत्रवान्, अच्छे कार्य करने वाला, गीत और
कलाओं में निपुण, राजा से लाभ ( जा० सं० ) । विद्वान्, लोकप्रिय, ग्रंथकार, कार्य में
समर्थ बहुपुत्र, घनवान् (qo पा०) ।
१२--व्यय में पंच मेश-क्ूरग्र हु-पुत्र से हीन, पुत्रों के दुःख से संतापित, परदेशवासी | शुभग्रह हो तो सुन्दर पुत्र हो (मान०)। पापग्रह हो तो पत्रहीन, शुम हो तो
पुत्रयुक्त, पुत्र संताप से युक्त, परदेश में जाने में तत्पर (जा० सं०) । पुत्र सुख पे हीन,
दत्तक या करोत पुत्र वाला (qo पा०) 1
पंचमेश का विशेष फल--
१--पुत्र सुख-लग्नेश व पंचमेश पंचम भाव में हो या केन्द्र त्रिकोण में हो तो पूणं रूप से पुत्र सुख हो ।
२--पुत्र का अभाव-पंचमेश ६-८-१२ भाव में हो तो पुत्र का अभाव हो (वृ०्पा०)
३-पुत्र न हो या मरे-पंचमेश अस्त हो या पाप युक्त हो तो पुत्र नहीं होता
होवे तो मर जाता ë (qo पा०) ।
४--संतान नष्ट स्त्री काकवंष्या-पंचमेश ६भाव में या मंगल से युक्त हो तो उनकी
प्रथम संतान होकर नष्ट हो जाती है और स्त्री काकवंध्या हो जाती है ।
५--स्त्री काकवंध्या-पंचमेश नीच में होकर ६-८-१२ भाव में हो या पंचम भाव
में केतु और बुघ हो तो उसको स्त्री काकवंघ्या हो जाती ë 1
६-स्त्री काकवंध्या-पंचमेश नीच में होकर पंचम भाव को नहीं देखता हो और
पंचम में शनि बुघ हो तो भी स्त्री काकवंध्या हो 1
७--यल से पुत्र-पंचमेश नीच में हो लग्न में नवमेश हो, पंचम में केतु बुघ हो
तो बहुत यत्न घर्मानुष्ठान आदि से पुत्र होता ë (qo पा०) ।
¿Z— से पुत्र-पंचमेश ६-८-१२ में हो या शत्रु राशि या नीच में होकर
पंचम भाव में हो तो भी यल करने से पुत्र होता है 1
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