सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 402, कुल 418 में से
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३८६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
९--कन्या हो-पंचमेश चन्द्र के द्रेष्काण में और चन्द्र से युवत हो तो कन्या संतति
होती हैं । (qo पा०)
१०--मृत्यु-पंचमेश चर राशि में होकर चन्द्रमा राहु से युक्त हो शनि पंचम भाव
में हो तो जातक मर जाता है (वृ० पा०) ।
११-नीचपुत्र-पंचमेश नोच राशि में प्रथम भाव में ३ या ४ पापग्रह से युक्त हो
तो नीच कमं करने वाला पुत्र हो (qe पा०) |
१२--एक पुत्र-पंचमेश गुरु हो या सूर्य शुभ स्यान में हो या केन्द्र या कोण में
बुम ग्रह हो तो १ पुत्र हो ।
१३- पूर्ण पुत्र सुख-पंचमेश उच्च में होकर २, २, १, या ५ घर में हो और गुरु
से युक्त दृष्ट हो तो वह पूणं पुत्र सुख पावे (qo पा०) ।
१४--३२-३३ वर्ष में पुत्र-पंचमेश शुक्र के साथ हो पंचम में गुरु हो तो ३२-
३३ वर्ष में पुत्र हो (qo पा०) ।
१५--३०-३६ वर्ष में पुत्र-पंचमेश केन्द्र में हो पुत्र भाव के कारक ग्रह से युक्त
हो तो ३० या ३६ वर्ष में पुत्र हो ।
१६--! ० पुत्र-चतुथं. और षष्ठ भाव में पाप ग्रह हो लग्नेश के साथ पंचमेश
परमोच्च में हो, पुत्र भाव कारक शुभ ग्रह युक्त हो तो १० पुत्र हों (qo पा०) 1
१७--६ पुत्र हों ३ मरें-पंचमेश के साथ धनेश पुत्र भाव में हो तो ६ पुत्र हों
उनमें ३ का मरण हो जाता है (वु० पा०) ।
१८--३२ वर्षे में पुत्र मरण-पंचम में राहु हो, पंच मेश पाप ग्रह से युक्त हो तथा
गुरु नीच में हो तो ३२ वर्ष में पुत्रका मरण हो (qo पा०) ।
१९-घुडिमान् निष्कपटो-पंच मेश सुस्थित हो ओर उसे वैशेषिक्रांश प्राप्त हो तो
बुद्धिमान् और निष्कृपटो हो (फल०) ।
-षष्ठेश का प्रत्येक भाव में फल
१--लग्न में षप्ठेश -रोग रहित, बलवान्, कुटुम्ब को कष्ट देने वाला, आत्मपक्षोय
जनों से युक्त, शत्रु हंता, स्वच्छंद रहने वाला, इच्छित घन एकत्र करने वाळा. (मान०) ।
रोग होन, उत्पाह वजित, कुटुम्ब से कष्ट पाने वाला, बहुत से पक्ष वाला, शत्रु नाशक,
इच्छानुसार कहने वाला, घनवान्, (जा० सं०) । रोगी, यशस्वी, अपने सम्बन्धो का
शत्रु, घनो मानो, साहसी, गुणी (zo पा०) ।
२--घन में षष्ठेश-बड़ा दुष्ट, प्रत्येक कार्य में चतुर, घन प्रतिष्ठा बढ़ाने में तत्पर,
अच्छी जग रहने वाला, सर्वत्र विख्यात, व्याधित शरीर वाला, मित्रों का घन नाशक
(मान०) । दुष्ट, चतुर, संग्रहकर्ता, विख्यात, व्याधि वाला, पुत्र से हरे हुए घनवाला,
साहसी, कुळ में श्रेष्ठ, विदेश वासो, सुखी, वक्ता, अपना कर्तव्य करने वाला (बृ०पा०) ।
३--सहज में-छोगों को कष्ट देने वाळा, अपने कुटुम्बियों के मारने में चतुर, संग्राम
में शत्रु से कष्ट (मान०) क्रूर ग्रह हो तो अपने जनों को कष्ट कर्ता, पिता को लक्ष्मी से