भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 411, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 411

भावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३९५

८-ऱ्यात्रा में सुख-नवमेश केन्द्र या कोण में होवे । (जा० दीर, \ Mp rg

$--भाग्यहीन-माग्येश तथा शुक्र पापग्रहों के साथ ६-८-१२ स्थान में होतो भाग्यहीन होता है । भाग्यवान्‌-परन्तु जब केन्द्र, कोण या लाभ में हो तो भाग्यवान्‌

होता है।

१०--साहसो घनी-नवमेश गुरु बली हो सूर्य चंद्र दोनों को दृष्टि हो तो बड़ा साहसी और घनी हो 1 अपनी राशि में हो तो पराये घन से युक्त हो (जा० सं०)।

११--एऐस्वर्थ व धन-नवमेश गुरु सूर्य qq दोनों से दृष्ट हो तो सुन्दर ऐश्वर्य वाला

मनोहर, घन, स्त्री, भूषण से युक्त, काव्य कला का ज्ञाता ।

१२--उत्सव कर्ता, चौपाया युक्त -नवमेश गुरु सूर्य शुक्र दोनों से दृष्ट हो तो साम￾बेद का ज्ञाता, उत्सव कर्ता, गौ महिषो आदि मे युक्त साहसी हो।

१३--कोषपति नायक-नवमेश गुरु सूर्य और शनि दोनों से दृष्ट हो तो कोषपति,

संग्रह कर्ता, चतुर, विख्यात, गुणी तथा देशगुरु और श्रेणीनायक्र होता है (जा० सं०) ।

१०--दशमेश का प्रत्येक भाव में फल

(१) लग्न में दशमेश--माता का वैरी, पिता का भक्त, पिता को मृत्यु के बाद

उसकी माता अवश्य पर पुरुष से प्रसंग करे (मान०) । माता से वैर कर्ता, पिता का

भक्त, बालपने में दुःखी, उसकी माता पर पुरुष से प्रीत युक्त रमे (जा० सं०) । जातक

विद्वान्‌, विख्यात, धनी, कवे, बाल्यावस्था में रोगी पोछे तुखी, दिन दिन घन को वृद्धि

(वृ० पा०) ।

(२) घन में दशमेश--बड़ी आयु तक भी माता से पालन किया जावे, माता में

दोष देखने वाला, अल्प भोजी, शास्त्रानुकूल सत्कर्म करने वाला (मान०) । माता से

पाले हुए पुत्र वाला, लोभी, माता के ल्यि दुष्ट, थोड़ी त्रास वाला, अल्प कमें वाला

(जा० सं० ) । घनी, गुणी, राजमान्य, अति दानी, पिता आदि के सुख से युक्‍त

(वृ० पा०) ।

(३) सहज में दशमेश--माता च स्वजनों का विरोधी, सेवा में निरत, किसी कमं

में सामर्थ नहीं, मामा से पालन किया गया (मान०) । माता व स्वजनों से विरोध कर्ता,

सेवा कर्म कर्ता, काम करने में असमर्थ, मामा से पाला हुआ (जा० सं०) । भाई और

नौकरों के सुख से युक्त, पराक्रमी, गुणो वक्ता सत्यमाषी (qo पा०) 1

(४) सुख š दशमेश--सब सुख भोगो, सदाचारी, माता पिता का भक्त, राजमानी

(मान०) 1 सुख और माता पिता के पालन पूजन में युक्त, सब जनों को अमुत के समान

प्रिय, राज सम्बन्धी लाभ से विभूषित (जा० सं०) । सुल्ली, माता का भवत, वाहन, भूमि

गृह से सुखी, गुणी, ओर घनी (qo पा०) ।

(५) पंचम में दशमेश--शुम कमं करने वाला, विडम्बी, राजा से छाभ युक्त,

गाने बजाने में निरत, मामा द्वारा पालित ( मान० ) । शुभ कमं कर्ता, विडम्बना

F#m