सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 410, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३९४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
स्त्री पुष्पयुबत (जा० सं०) स्त्री के द्वारा भाग्योदय, गुणी, यशस्वी और हिजातियों में श्रेष्ठ (ao पा०) ।
८--अष्टम में नवमेश-बड़ा दुष्ट, जीवहंता, घर तथा भाइयों से विवजित, पृण्यहीन।
यदि क्रूर ग्रह हो तो-नपुंसक (मान०) । दुप्ट हिसक, बन्धुजनों से होन, पुण्यहीन,
क्रूर ओर खंडित (जा० २०) 1 भाग्यहीन, बड़े भाई के सुख से हीन (वृ० पा०) ।
९--नेवम में नवमेद--सुकृत मति, भाई बंधु से प्रीति, सबसे समता रखने वाला
(मान -) । बांधवो के साथ प्रीति, अनुचित बल, दानी, देवगुरु, स्वजन स्त्रो आदि में
भक्ति (जा० सं०) । अत्यन्त भाग्यवान्, गुण रूप और सहोदरो के सुख से युक्त (बु० पा०) ।
१०--दशम में नवमेश-राजाओं के कमं करने वाला, शूरवीर माता पिता का
पूजक, घर्म विख्यात (जा० सं०)4 राजा या राजा के समान, मंत्री या सेनापति, गुणी, लोफ्रमान्प (बु० पा०) ।
११--डाभ में नबमेश-दोर्घायु, धर्मी, धन स्वामी, स्नेही, राजा से लाभ पाने वाला
पुण्य करने मे विख्यात (मान०) | दीर्घायु, घमंयुक्त, धन स्वामी और स्नेही, राजा से
लाम पाने वाला, पुण्प्र में विख्यात (जा० सं०) । नित्य लाभ करने वाला, गुरुजनों का भक्त, गुणी, पुण्यात्मा (वृ ० पा") ।
१२--व्यय में नदमेश-बडा मानी, देशान्तर में रहने वाला, कुरूप, विद्यावान्
पापग्रह हो तो अत्यन्त धूर्त (मान०) । देशान्तर में लाम वाला, सुन्दर रूप घाला,
विद्यावान्, यदि पापग्रह हो तो कुबु.द्ध और धुत (जा० सं०) । भाग्यहीन, शुभकाय में
अधिक खर्च, अतिथियों के आदर से निधन (go पा०) 1
(९) नवमेश का विशेष फल
१--जन्म के बाद पिता मरण-नवमेश दुःस्थान में हो या २ पापग्रहों के बोच हो
या मंगल या शनि नवम घर में हो तो जन्म के बाद शीघ्र पिता का मरण हो (फल०) ।
२--पिता दीघंजीवी-यदि दिन में जन्म हो तो सूर्य, रात्रि में जन्म हो तो शनि
सुस्थित हो और शुभग्रह को दृष्टि हो नवमेश भो प्रबळ हो तो जातक का पिता दीघंजोवी होता हे (फल०) ।
-— अन्य पिता की रक्षा में-शनि नवमेश होकर चर राशि में हो और शुभ दृष्टि
न हो या सूर्य दुःस्थान में हो तो वह अन्य पिता की रक्षा में रह कर जीये (फल०) ।
४--दूसरा दत्तक बनावे-तवमेश या नवम घर में चर राशि हो और शनि से युक्त
गं हो यदि (२वां घर का स्वामी बली हो तो जातक को दूसरा दत्तक पुत्र बनावे
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५--कीतिमान्-नवमेश लग्न में हो तो जातक कीतिमानु हो (जा० पारि०)
$--विशेष कोति-नवमेश घन में हो वही उच्चादि से युपरत घन भाव में हो तो विशेष कीति हो (जा० पारि०) ।
७- शरीर नाश दुजंन-नवमेद दुष्ट स्थान में हो तो चंचल, यात्रा से शरीर का
नाझ हो वा दुर्जन हो (जा० पारि०) ।