भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 409, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 409

भावेश का भिन्न-भिन्न भावों में फल : ३९३

र (२) दीर्घायु--अष्टमेश या sss स्वगृही हो अपने नवांश या अधिमित्र के नवांश में न हो परन्तु मित्र के नवांश में या घर में हो तो दीर्घायु होता है । (३) दोर्घायु अष्टमेश--लग्नेश, कर्मेश तथा शनि त्रिकोण छाम में या केन्द्र में हो तो दीर्घायु होता है ।

(४) अल्पायु--अष्टमेश पाप ग्रहों के साय हो या अष्टम में लग्नेश हो तो अल्पायु हो । इसी प्रकार से दशमेश से भी आमु विचारना।

“*-नवमेश का भिन्न भिन्न भाव में फल

लग्न में नवमेश-देवगुरु का मानने वाला, बड़ा शूर, कृपण, राजा के समान कमें

करने वाला, अल्पाहारो, विद्वान्‌ (मान०) । शूरवीर होकर देव गुरुजनों का सत्कार

करता है, कृपण, राज्य कमं कर्ता, थोड़ा संग्रह कर्ता, बुद्धिमान्‌ (जा० सं०) । भाग्यवान्‌

राजमान्य, सुशील, सुन्दर, विद्वान्‌, लोकपूज्य (go पा०) ।

२--घन में नवमेश-बल के निमित्त से विख्यात, उत्तम स्वभाव, सबका प्रेमी

सुकृत करने वाला, मुल में झांई, चोपाये पशु से पीड़ा (मान०) 1 srl के सम आचरण,

'विश्यात, अच्छे शील से युक्‍त, सत्यमाषो, पुण्यात्मा, चोपायों से उत्पन्न हुई पोड़ा, मुख

में अंगहीन (झांई) । (जा० सं०) । पंडित, लोकप्रिय, घनो, कामी, स्त्री पुत्रादि सुख से

युक्त (qo पा०) ।

३--तृतीय में नवमेश--रूपवती स्त्रो तथा वांघत्रों से प्रेम करने वाला, वंबुबर्ग ओर

सत्री का रक्षक । यदि जीता रहे तो सदा भाई बंधु समेत रहने वाला (मान०)। रूप

स्त्री बंधु इनसे प्रेम करने वाला, बंधु, स्त्री का रक्षक, बांधव गणों से युक्त होकर जोता

' है (जा० सं०) | भाई के सुख से युक्त, धनी, गुणी, रूप और शीळ से युक्त (वृ० पा०)।

४--चतुथ में नवमेश-पिता का भक्त, पितृ यात्रा आदि में विख्यात, सुकृत करने

'वाला, पितृ कर्मो में बुद्धि रखने वाला (मान०) । पिता का भक्त, पिता का पूजक,

विख्यात, अच्छा कायं करने वाळा, मित्र वर्गों में और उत्तम कर्म में प्रोति होवे

(जा० सं०)। घर को सवारी से सुखी, सब सम्पत्ति से युक्त, माता का भक्त

(वृ ० पा०)।

५--पंचम में नवमेश-सुकृत करने वाला, देवगुष पूजक, शरोर से सुन्दर, अनेक धमं

निष्ठ (मान०) । पुण्यात्मा, देवगुरु पूजक, शरीर सुन्दर, उसके पुत्र अच्छे कार्य से युक्त

'(जा० सं०) । पुत्र सुख से युक्त, गुरुमवत, घोर, धर्मात्मा और पंडित (बृ० पा०) 1

६--पष्ठ में नवमेश-शत्रु की प्रणति करने में परायण, धर्मकर्ता, किंचित न्यून कारय

करने वाळा, दर्शन की निंदा करने वाला (मान०) । शत्रु प्रयत पालक ओर घमंहीन,

कला से विफल शरोर वाला, दर्शक निदा में तत्पर (जा० सं०) । अल्प भाग्यवान्‌, मामा

आदि के सुख से होन, शत्रुता से दुःखी (go पा०) 1

७--सप्तम में नव मेश-सत्य बोलने वालो, सुख्या शीलयुक्त लक्ष्मी से युक्त) पुण्यवतो

स्त्री मिळे (मान०) । सत्यमाषिणो स्त्री, अच्छे वचन और रूप वालो, शील, श्रीयुक्त