भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह, उनके नाम ओर गुण-धमं : ३७

कुण्डली में qg विशेष प्रधान होता है । किसी कुण्डली में गुरु बलवान्‌ हो और सूर्य चन्द्र का षड़ष्टक योग हो तो कुण्डली का महत्त्व नहों रहता । ज्ञान सुख सम्पत्ति वैभव, संतति, सयानापन, अध्यापकत्व, परमार्थ, पुण्य कर्म, तीर्थ, साधु समागम, योग मार्ग, दीर्घायु आदि इसका प्रधान :घर्म है। १, ९, १०, ५, ११, २, इन स्थानों में इसका महत्त्व है ।६-८-१२ स्थान में यह निष्फल है। इतर स्थानों में मध्यम फल देता है ।

यह ककं में उच्च का है । तुला सात्विक राशि में हो तो बह्‌ सतगुणों का पुतला हो । ३, ७, ११ राशि में विद्वान्‌ ओर शास्त्रज्ञ हो १, ४, ५, ९, १२ राशि में सम्पत्ति और वैभव देता है । मकर राशि में कर्मनिष्ठ होता है ।

ऐसी धारणा है कि गुरु जिस स्थान में रहता है उस स्थान का नाश करता š

परन्तु उसका स्थान-विशष का महत्त्व है । गुरु यह संतति देने वाला ग्रह है । अस्तगत हो तो सन्तान अल्पायु हो । सिंह कुम्भ बंध्या राशि है इनमें अस्तगत हो तो गर्भ ही

न रहे।

इसका मंगल से योग हो तो संतान अल्पायु होगी या गर्भ नहीं रहे। शनि के

साथ हो तो संतान नहीं होवे । ४:८-१०-१२ बहु-प्रसव राशि में गुरु बहुत सन्तान

शीघ्र २ देता है । २-४-८-१०-१२ स्त्री राशि में गुरु कन्या सन्तान देता है । पुरुष राशि में पुत्र देता है । वक्री गुरु हो तो सन्तान के अनुकूल नहीं है: पुत्र-चिन्ता उत्पन्न कराता

है कन्या सन्तान देता हैं ।

, सब योग में गुरु चन्द्र का योग महत्त्वपूर्ण है 1 गुरु का किसो ग्रह को युति को अपेक्षा

त्रिकोण योग, केन्द्र योग में विशेष महत्त्व: है । त्रिकोण योग में विद्या, कोति, परमार्थ

योग शिक्षण, अध्यापकत्व धार्मिकता, परोपकार यश देता है। केन्द्र योग में घनी,

राज वैभव अधिकार मान देता है । यह ग्रह उद्दीपक है जिस ग्रह से युक्त हो उस

ग्रह का घर्म ज्ञान ज्योति से प्रकाशित होता है। जब २ था १२ स्थान में मंगल नहीं

हो तो यह सम्पत्ति दाता है। नवम पंचम स्थान में रवि मङ्गल, शनि, नहीं हो तो यह

शा सुख देता है। यह लग्न रवि ब चन्द्र से. एकादश योग करता हो तो बहुत घन देता है। Ë

शुक्र i

u: यह कामचेष्टा का सूचक है । अनेक रंग हैँ । जातक का रंग स्याम गौर, पूर्व दिशा

व आग्नेय दिशा का स्वामी व सांसारिक सुख का विचार इससे होता हे । यह कारूपुरुष

का मदन ओर मंत्री है ।

स्त्री ग्रह, जलतत्त्व, जल ग्रह, कमं वीर्य, घातु कारक, कलत्र, विवाह, काम सम्बन्धी

कार्य, सुख, काव्य, पुष्प, आभरण, नेत्र, वाहन, शैया विभव, कविता, राजभोग, ओर

स्त्री का कारक है । š र ;

वर्ण सांवला ने अति गोरा न अति काला है । दुबके समान शरीर का रंग