भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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३६ ! ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

बुद्धिमत्ता इसका प्रघान घर्म हे । कुण्डली में बुध बलवान्‌ हो तो वह अति बली

और वक्ता होता है । दुसरे भाव में जहाँ विद्या और वाणी का विचार होता है वहां

बुघ हो तो वह अति वाचाल और विद्यासम्पन्न होता है । पंचम स्थान में भी बुघ उत्तम

बुद्धि देता हे । बुघ का जितना महत्त्व १-२-५-९-१० स्थान में है उतना और कहीं

नहीं है । मिथुन राशि में अति बली होता है,. शास्त्रज्ञान, स्मरण शक्ति, वक्तृत्व, ग्रन्य

कतृंत्व इससे मिलता है । कुम्भ राशि में वक्तृत्व शक्ति में बहुत कमो कर देता है, परन्तु

वेदान्त आदि गूढ़ विषय, तत्त्वज्ञान व संशोधन करने को शक्ति . देता है । तुला राशि में

सब प्रकार को विद्या की ओर मति देता है । विना भूल के स्वयं पद्धति से काम करने

की शक्ति बुघ से मिलती हे । कन्या का बुध उच्च का है इससे हस्त कोशल, राजकीय

वैभव, वैद्यकी, व्यापार आदि में अपने समान गुण देता है।

बुघ यह सूर्य के आस पास ही रहता है । सूर्य के आगे इसका रहना अच्छा है ।

पीछे रहना उतना प्रभावकारी नहीं है । इंसका सूर्य के बराबर योग हो तो विद्या

बुद्धि वेभव देता है । गणित में व कार्य में सूक्ष्म बुद्धि देता है। बुघ अस्त होने पर भी

फल देता है । . j

यह नपुंसक ग्रह है, इससे जिस ग्रह के साथ इसका योग होता है वह उसके फळ का सहारा लेता है । बुघ मंगल के साथ अच्छा नहीं है । झूठ'बोलने की प्रवृत्ति और व्यर्थ की बातों में बुद्धि का झमेला उत्पन्न करता है । गुरु के साथ इसके योग से विद्वत्ता, काव्य, ग्रन्य रचना, अध्यात्म ज्ञान आदि देता है । शुक्र के साथ ललित कला

यंत्र रचना व सब प्रकार का कला कौशल दर्शाता है । ज्ञान के साथ वक्तृत्व शक्ति क्षीण करता ë

गुरु

रंग पीत, कंचन वर्ण, गोरा, आकाश तत्त्व, चर्बी कफ घातु की वृद्धि करता है,

घर्म कमे, देव ब्राह्मण, गृह, पुत्र, बन्धु, पोत्र, पितामह, सत्त्वगुण, मित्र, मंत्री, घनागार

विद्या, उदर का कारक है । यह कालपुरुष का ज्ञान बुद्धि, मंत्री सलाइ करने वाला देव पुरोहित है | हल्दी सरीले -पीत वर्ण का यह स्वामी है। आकाश के अधीन है ।

पीलाई लिये आँखें, पिंगल केश, पीन और उन्नत हृदय, वृहत्‌ शरीर, कफ आत्मज, सिंह या शंख शरीखा शब्द, सदा धन की चिन्ता में रहे। चर्बी पर इसका प्रभाव है। दानी, पुत्र, शिक्षा, घन, स्वास्थ्य, पुजारी, ज्ञान और सुख स्वरूप है। वेदान्त शास्त्र में निपुण, शान्त स्वभाव, गुण सम्पन्न, विद्वान्‌, सत्य कर्म का आचरणो, समाज कार्य में प्रवीण, परोपकार प्रिय, सत्य अभिमानी, बुद्धिमान, संकट ग्रस्त, . दुसरो की आपत्ति को अपने ऊपर लेकर सहायता करने वाला, राज दरबार में मान प्रतिष्ठा, मिछाऊ, कोमल हृदय, गुणी, मृदु वाणी, सवं प्रिय, सत्य के लिए कष्ट सहन कर विजय प्राप्त करने वाला, द्रव्य सम्बन्ध से उदार बुद्धि, प्रापंचिक, धर्मशाला, ईदवर भक्त, दीन का सहायक अच्छी सलाह देने वाळा, अनीति के मागं से दूर रहने वाला ।