सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 51, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रह, उनके नाम गुण-धमं : ३५
' मिथुन का मंगल प्रवल वाणी देता है, स्वाभिमानी बनाता हे तुला का मंगल
अन्तःकरण को स्फूर्ति देता है । कुम्भ राशि में तत्ववेत्ता करता है । मंगल ग्रह स्वभाव
से अहंकारी है । इसमें बौद्धिक राशि हो: तो वह समझने लगता है कि गुरु की अपेक्षा g
अधिक जानता हूं ।
लग्न, तृतीय, षष्ठं में मंगल साहस, वीरता, लड़ाऊपना देता हैं । सेना और पुलिस
वालों की कुण्डली में इसका प्रभाव दीख पड़ेगा। १-२-४-७-८-१२ स्थान में मंगल
क्रूर नक्षत्र में हो तो विवाहित स्त्री का शीघ्र नाश हो । न i
पंचम या लाम में मंगल क्रूर नक्षत्र में हों तो गर्भपात होता है, जीता नहीं है । २
या १२ स्थान में मंगल हो तो घन का संग्रह न हो यदि घनवान् को कुण्डली में. यह
योग हो तो घन का नाश करे उसे रुपया की कदर न रहे ।
दशम में मंगल का बड़ा महत्त्व है ।' उसकी. महत्त्वाकांक्षा तीव्र हो।. सामथ्यं से
अधिक काम अपने हाथ में ले लेवे और कठिन कायं को अपने उद्योग के वल पूरा
करे, अधिकार युक्त हो । दशम में १, ५, ९, १० राशि हो तो अच्छा है इनकी अपेक्षा
दूसरी राशियाँ यहाँ निवंल हैं ।
बध यह वाणी का स्वामी है, रंग गहरा हरा है कुछ स्याम वणे लिये, पृथ्वी तत्त्व,
न्निदोष घातु कारक, ज्योतिष, चिकित्सा शास्त्र, गणित विद्या, लेखन कला शास्त्र; शिल्प,
वकालत, वाणिज्य आदि, राज कुमार, वाचस्पति तथा चतुर्थ एवं दशम स्थान का
कारक है !: परन्तु चतुर्थ स्थान में यह निष्फल है। जिह्वा और उच्चारण के अवयव
का इससे विचार होता है यह शुष्क ग्रह हैं। यह काल पुरुष का वाचा व राज कुमार
है । उपचय में बरिष्ठ हो तो राज्य साधक होता है। अन्यथा हानि करता ë
यह शुभ ग्रह है परन्तु क्रूर ग्रह की संगति से क्रूर हो जाता है, यह हरे रंग का
स्वामी है, नपुंसक है, पृथ्वी का स्वामी, पृथ्वी के अधीन है, रजोगुणी, शूद्र, शूर स्त्रियों
के ठिकाने के प्रति लोगों में प्रिय, स्वभाव गदगदा, हँसने बोलने वाला, वात कफ मिश्रित
प्रकृति, त्वचा बहुत, क्रीड़ा खेल का स्थल, . हरा एवम् सडा वस्त्र, कांसा घातु, अथर्वण
वेद का स्वामी, मिश्र रस, नसों से पूर्ण शरीर, भाषण में आनन्द देने वाला, लाल और
चौड़ी आंख, सम अंग, हास्य में रुचि, इसका प्रभाव चमं पर, चालाक, अच्छी बोली,
हंसोड़, दिल्लगी बाज, बातूनी, ज्ञानी, सुन्दर, सुस्वरूप, प्रफुल्लचित्त, वाक् पट्, स्पष्ट
व्यौहार, उत्साही, संदा आनस्दी, धूर्त, वाहन प्रिय, नोकर चाकर का सुख, अविश्वासी,
समय पर दगा देने वाला, पैसा सम्बन्ध से विचित्र व्यौहार, कुटुम्ब के विषय में
बेफिकर, धन्घे' में नवीन कल्पना; प्रयत्न में मन चिन्तित, आतुर, होते हुए चेहरे पर
परिणाम न दिखें । बेफिकर रहने वाला, उद्योग में निमग्न, प्रत्येक घन्धे का ज्ञान
परन्तु किमी qz में प्रवीण न हो, अध्यात्म विषय प्रेमी, शास्त्रीय गहन विषयों में निमरन
परन्तु अपना हृदय छुपा कर रखने वाला, कष्ट साध्य, घोखे का कार्य करने वाला ।