सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 50, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें३४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
श्रद्धा, सत्य भाषण-प्रिय, भविष्य की अपेक्षा वर्तमान काल को अधिक महत्त्व देने
वाला, अनियमित किन्तु कुशल, कभी-कभी उद्योग में रत, निष्कपटी, मित्रता योग्य, सुधार
मत वादी परन्तु आचार भ्रष्ट ।
मंगल वक्री होता है तो एक राशि पर बहुत समय तक रहता-है । मंगल एक शक्षि
पर वक्र होकर पुनः मार्गी होकर उसी राशि पर आता है तो कई महीने छग जाते हैं
उसे कुजःस्तभ कहते हँ । जब मंगल पृथ्वी के समीप आता है तो तेजस्वी दिखता है
उसका परिणाम विशेष होता है। ,
यह युद्ध का देवता है, कोई अधिकार प्रयत्न में योग्यता, युद्ध विशारदत्य ब आत्मनिष्ठा ये मंगल के मुख्य धर्म Q । यह अपघात या नाशकारी भयंकर घटना दर्शाता ë 1
मंगल के अरिष्ट परिणाम से लाल रंग को ग्रंथि, रक्तस्राव, मूल व्याधि, शीतला आदि
व्याधि होतो ë 1
, मंगल का प्रभाव--अग्नि स्थल, सुनारी काम, रसायन शाला, रणक्षेत्र, सैन्य स्थल,
हृत्या के कायं व उसका स्थल, आघात का स्थल, औषधालय, सर्जरी आदि के स्थल पर
मंगल का अधिक प्रभाव पड़ता ë ।
यह भी शनि से.बिगइता है। मंगल और शनि के योगादि से भयंकर घटनाएँ
होती ह । शनि से.जो मंगल का परिणाम होता है उसकी अपेक्षा मंगल से शनि चौथा
होने पर अधिक भयंकर परिणामु होता है। मंगल से शनि चौथा हो तो जीवन के
सम्बन्ध से अपघात, शरीर में चोट आदि घटनाएँ हों । धन के संग्रह में अनेक अड़चनें
हों, दिवाला तक निकल जाने का संयोग प्राप्त हो सकता है । शनि मंगल के योग से
जानलेवा घटनाएँ हो सकती हूँ ।
शनि मंगल का योग लग्न में हो तो अकाल मृत्यु या भयंकर व्याधि संभव है ।
घन स्थान में हो तो कुटुम्ब और घन का नाश कर ऋण फो वृद्धि करे । तीसरे भाव
में हो तो भाइयों की अकाल मृत्यु भयंक्रर रीति से होती है । चतुर्थ में मातृ सुख, घर
“वाहन आदि का सुख लाभ नहीं होता, ऊपर से गिरने को घटना हो । पञ्चम में गर्भपात
हो, संतान रोगो या अल्पायु हो। षष्ठ में शत्रु से नाश या स्वतः का मरण हो।
सप्तम में हो तो एक भी स्त्रो दीर्घायु न हो, जीवन लड़ते झगड़ते बोते । अष्टम में धन
नाश से बुरा अरिष्ट हो। नवम में पितृ सुख न मिले, अपकीति हो। दशम में अनेक
घंघों में हानि होकर निर्घन हो, मान हानि हो, पिता का सुख न मिले, राजकीय आपत्ति
की सम्भावना हो । “लाभ में संतति नष्ट हो मित्र से विरोध हो । व्यय में हो तो दरिद्र
` हो, कर्ज बढ़े. राज दंड भोगे ।
ककं राशि का मंगल स्त्री के विषय में अप्रिय घटना करता है । १, ५, ९, राशि
और अश्विनी, मघा, मूल, नक्षत्र में मंगल मनुष्य ' को कुलदीपक प्रसिद्ध और श्रेष्ठ
बनाता है । वृश्चिक इसकी स्वराशि है परन्तु मेष राशि सदृश इसका उतना प्रभाव
नहीं रहता ।