भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ह, उनके नाम ओर गुण-धर्मं : ३३

चन्द्र गुर का योग अति महत्त्व का है । संस्था को स्थापना, शिक्षा दैना, अध्यात्म

विद्या, गुरुत्व, कीति वृद्धि, पूर्ण यश, बहुत सम्पत्ति और अगाघ ज्ञान प्रगट करता है ।

१, ५, ९, १०, या ११ स्थान में यह योग बहुत महत्त्व का है ।

चन्द्र शुक्र योग से कामदेव सरीखा रूप, विलास, शानशौकत व ललित कला देता

है। चंद्र शनि योग दुःख दरिद्र देता है । अग्नि राशि ४-८ इन राशि में, तीक्ण नक्षत्र

में, ६-८-१२ स्थानों में यह योग हो तो उसका जीना निरथंक है। वात प्रधान रोग

दमा आदि इसमें होता ë । आयुष्य क्षीण होती है ।

कुंडली में लग्न सुर्य चन्द्र के विचार का विशेष महत्त्व दै । अन्य योग कितने ही

अच्छे हों पर तीनों की स्थिति अच्छी न हो तो इसी के अनुसार फल मिलेगा । मंगल

यह बल रूप है । रंग अति लाल 1 इसके प्रभाव से रक्त गौर होता है, अग्नि तत्त्व,

पित्त प्रकृति, मज्जा का स्वामी, शुष्क ग्रह है । शक्ति, भूसम्पत्ति, कृषि, धैर्य, रोग, भ्राता

(अनुज), पराक्रम, अग्नि, सेनापति तथा राजशत्रु का कारक ë 1

यह द्वितीय स्थान में निष्फल है, दशम में दिवली होता है । वक्री तथा युद्ध में

पराजय करने पर या चन्द्र के साथ रहने पर इसे चेष्टाबल मिलता है । मांस पेशियों की

उष्णता और निर्बलता इस पर निर्भर है। यह कालपुरुष का बल है । मंगल जिस￾नजि हो उस राशि के जिस अंश मेँ हो वहाँ भाने पर फल देता है । यह सेना

पति है । : :

जन्म समय उपचय स्थान में हो और बलवान्‌ हो तो बहुत कार्य का साघक होता

ë । यदि ऐसा न हो तो हानि करता है । स्वरूप लाल, किन्तु थोड़ा कमल सदृश सफेदी

लिए होता है 1 यह अति ऊँचा या ठिगना नहीं है, साधारण आकार का है ।

कुण्डली में सब से बलो हो तो जातक का वर्ण मंगल सदुश रहे । यह लाळ पदार्थ

का स्वामी है । कातिवीर्य देव है,.क्रूर ओर पुरुष ग्रह है । अग्नि का स्वामी, अग्नि क्को

स्वाधीन करता है । यह क्षत्रिय है, सबसे बलवान्‌ और तमोगुणी है । लोगों को धोखा

दे, भूख, आलसी, क्रोधी, अतिनिदित स्वभाव ।

जन्म समय जिसके त्रिशांश में सूर्य मङ्गल हो तो उस ग्रह का गुण जातक में प्रकट

दिखे और सब में बलवान्‌ रहे ।

इस को क्रूर दृष्टि, तरुण मूर्ति, उदार, पित्त प्रकृति, अत्यंत चंचल स्वभाव, उदर

कृष, रक्त और धातु बहुत, कडू रस, सामवेद का स्वामी, कमर पतली, घुंघराले और

चमकीले बाल (कुञ्चित केश), क्रूर नेत्र, उग्र, छाल वस्त्रधारी, रक्त तनु, प्रचण्ड, अति.

उदार, देखने में तरुण, मज्जा और मांस पर इसका प्रमाव होता है ।

जवानी; रक्त, भाई-बहन, भूमि पर प्रभाव होता है । क्रूर, तेज स्वभाव, हठी सनकी,

साहसी, मौके पर हार न मानने वाला, दोघं उद्योगी, युक्ति से दूसरों को लड़ाकर अपना

कार्य साघने वाला, उड़ाऊ, दिलदार, वेफिकर, खुला और सच्चा व्योहार, घर्म पर कम

दे