भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 48

३२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

स्वामी Š । क्षीण चंद्र पाप ग्रह है, पूर्ण चन्द्र शुभ है । यह स्त्री ग्रह है, जल का स्वामी

Ë । वैश्य जाति, सत्त्व गुणी अर्थात दयाळु, सत्य, मृदुत्व, देव-ब्राह्मण भक्त, शरीर गोल,

नाजुक शरीर, शरीर मे बात ( वायु ) हो, कफ प्रकृति, बुद्धिमान्‌, कोमल भाषण, श्रेष्ठ

नेत्र, शिरा बहुत, स्थान जल, कोरा वस्त्र, धातु चांदी मणि, रस मोठा, स्थूल देह, युवा,

दुबला, काले ओर पतले बाल, इसका रक्त पर प्रभाव, भाषण में मुदु, श्वेत वस्त्र धारी,

मृदु स्वमाव, रंग कुछ पीलापन लिये, ठंड, दूष, मन, मां और .सफेद रंग पर प्रभाव ।

चंचल, उतावला, ऐश आराम तलपी, संसार में निमग्न, द्रव्याभिलाषी, शेखी बघारने

वाला, स्त्रो-लोलुप, कतंव्यहीन, धंधे के विषय में बेफिकर, फालतू आत्म विश्वास, स्वार्थी,

अस्थिर मन, व्यवहार में गोल माल, मृदुभाषो, सौम्य, उच्छृ खल, दिलदार, परन्तु

अविश्बासी अनियमित 1 इसका सम्बन्ध रक्त से भी है।

कुंडली में जिस प्रकार चन्द्र की स्थिति हो उस प्रकार मन होगा । मन और चन्द्र

एक सा है । १, ४, ७, १० इन चर राशि में चन्द्र हो तो मन अति चञ्चल <ë । इस

का मन योग साधन में नहीं लगेगा उसे एक स्थान में कहीं चैन नहीं मिलता । किसी

भी कारण से फिरता ही रहे, क्षण-क्षण में विचार बदले इसे अधिकार मिले तो बुराई *

करे | ३, ७, ११ इन बौद्धिक राशियों में चन्द्र हो तो उस का मन विद्या की ओर झुका

रहे। सिंह का चन्द्र हो तो अपने को बड़ा समझने लगता है व उस के लिए प्रयत्न करता

है । घन में शरीर की सामर्थ्यं की ओर मन जावे । ब्‌श्चिक में बदला लेने और नाश

करने का विचार रहे 1

सब कार्यो में पहले चन्द्र का बल देखे । इस का वणे गोरा है परन्तु राशि और योग

वश से बदल जाता है ।

६-८-१२ स्थान में चन्द्र अति बुरा है । ६ स्यान में अधिक बुरा है। इसमें अप￾यश देता हैं शरीर सुख कम करता है । शत्रू से पीड़ा देता है ८ या १२ घर में घन

सम्बन्धी अड्चन उत्पन्न करता है । मानसिक त्रास देता है । १, ४, १०, ९, ५ स्थान

में चन्द्र अच्छा है । लग्न या सप्तम में हो तो मनुष्य प्रवासी व विलासी होता है । अनेक

स्त्रियों का उपभोग करने वाला होता है ।

अमावस्या को चन्द्र निस्तेज हो जाता है, इस समय सब शुभ काम वर्जित हैं ।

चतुर्दशी युक्त अमावस्या सिनीबाली कहलाती है 1 इनमें जन्मे स्त्री पशु हाथी घोड़े आदि

लक्ष्मी का नाश करते हैं । प्रतिपदा युक्त अमावस्या कुह कहलाती है । यह मी दोष

कारक है इसमें भी पशु आदि का जन्म आयु व घन नाश करता है । अमावस्या का जन्म

अशुभ कारक है ।

चंद्र मंगल का योग लक्ष्मी दायक है परन्तु मंगल का परिणाम बुरा होता है । अपघात,

x नाना प्रकार की बीमारी भयंकर ताप आदि होते हैं । अग्नि राशि और draw नक्षत्र में

` ६-८-१२ स्थान में चन्द्र मंगल का योग बहुत दुखदाई होता है। चन्द्र बुध योग बुद्धिमत्ता

वक्तृत्व प्रगट करता दै 1 यदि यह योग बोद्धिक राशि में हो तो अति उत्तम g!