भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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ग्रह, उनके नाम और गुण-धर्म : ३१

भय होता है । झगड़े मुकदमे आदि होते हैं, सर्व व्यौहार में गड़बड़ी पड़ती है, इच्छा

अपूर्ण रह जाती है, पितृ सुख कम मिलता है, कई व्याधियाँ होती हैं 1 सूय पर शनि की दृष्टि पड़ने से भी यही फल होता है । सूर्य के चतुर्थ स्थान में शनि हो तो बड़ी आपत्ति

होती है आयु क्षीण होती हैं । सूर्यं से दशम में शनि हो तो अनेक बार घंघा बदलना

पड़े, राज्य संमान भी न मिले । पितृ सुख कम मिले । नौकरी में झगड़ा हो । सूयं से

२-१२ स्थान में शनि हो तो साढ़े सातो प्रमाण से फल होता है, द्रष्य मिलने में अनेक

कठिनाइयां हों पूर्वजों का उपाजित घन न मिले, पूर्वजों का कर्ज अदा न हो ।

रवि चन्द्र, इन का ट्ि्वादश या षड़ष्टक योग हो तो कार्य सिद्धि के लिये किया जाने

वाला प्रयत्न निष्फल होता है और बड़ी योग्यता प्राप्त होना कठिन है । इन दोनों ग्रहों का केन्द्र योग हो तो राज्य योग होता है । इनका त्रिकोण योग होने से कीर्ति प्राप्त हो,

प्रत्येक काम में यश मिले, पारमाथिक लाभ हो ।

रवि-बुध का योग विद्या और बुद्धि देता है। यह योग ३-७-११ राशि में अच्छा

हैं। रवि-शुक्र का योग हो तो कला-यांत्रिक विद्या देने वाला है । रवि गुरु का योग

  • विद्वत्ता और श्रेष्ठता देने वाला है । सूर्यं मंगल के योग से प्रकृति उष्ण रहे, रासायनिक

या अग्नि क्रिया सम्बन्धी घन्वा करे, साहस का कायं करे । सूर्य के दशम में मङ्गल हो

तो दीघं उद्योगी व अधिकार. वाला होता है । सूर्य के दशम स्थान में गुरु हो तो राज्य

सम्बन्धी अधिकारी हो । इस प्रकार सूर्य क्रा सामान्य फल है परन्तु स्थानवश सै किवा

योग, दृष्टि आदि वश से अन्तर पड़ जाता है अनेक भेद हो जाते हैं ।

लग्न में सिंह का सूर्य हो, दशमेश शुक्र की पूर्ण युति हो तो वह बड़ा राजकीय

अधिकारी या राजा सदृश वैभव मोगने वाला हो। सिंह का सूर्य दशम हो और उसमें

लग्नेश मंगल को युति हो तो भो उपरोक्त फल हो परन्तु इस समय मंगल षष्ठेश हो तो

राजकीय कार्य में शत्र ता करे ।

चंद्र

यह काल-पुरुष का मन है । इससे मन का विचार होता है। चन्द्र शीध्रगामी होने

से मन माना गया है । इसके अघोन इन्द्रियां ë ।

यह स्त्रो-ग्रह है । जल ग्रह, बात स्लेष्म घातु, रक्त स्वामी, माता, चित्त वृत्ति,

शारीरिक पुष्टता, राजानुग्रह, संपत्ति और चतुर्थ स्थान का यह कारक है । चन्द्र सूर्य

के साथ निष्फल हो जाता है, यह जड ग्रह है। मातु विषयक बातें, राज अनुग्रह और

मनुष्य के मेघावी होने का इस से विचार होता है ।

यह चतुर्थ स्थान में बली हूँ, मकर से ६ राशियों में इसे चेष्टाबल मिळता है । नेत्र,

मस्तिष्क, उदर, मूत्र स्थल का भी इससे विचार होता ë 1

चन्द्र राजा भी है । जन्म या प्रश्‍न में यह उपचय स्थान में हो और बलिष्ठ हो तो

राज कायं में सफलता देता है 1 अन्य स्थान में नाश करता है ।

चन्द्र शुभ वर्ण का स्वामी हे, देवता इसका जल ( वरुण ) है । वायव्य दिशा क.