सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 73, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैत्री, दृष्टि आदि : ५७
चक्र ३, पाचक बोघक आदि ज्ञान । चक्र ४, पाचक आदि का स्पष्टीकरण
ग्रह
१
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७ वां|
रक
९ वां|११
| वेधक | रे र
ग. x
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सुर्य से| शनि | मंगल | गुरु | शुक्र |१ सूयं| २ तीसरा पर २| ५। ९|११| रे - वुध से मंग. ० कणी चन्द्र से| शुक्र | मंगल | शनि | सूर्यं (२ चन्द्र २ शुक्र से छठा
होने पर ३| २। ६ | ११ | १२ होता है मंग, सूर्य | चन्द्र | शनि | बुध रिमंगल ० चन्द्र से तीसरा ५ | सूर्य होने पर
«| २| ४ ,५ | बुध |शुक्र से मंगल | वेधक होता है बुघ से| चन्द्र | गुरु | शुक्र | मंगल २ इत्यादि ।
५| s| ¿| ७| १२ | गुरु | ०
गुरु से| शनि | मंगळ | चन्द्र | सूयं
६| R| ६|१२| ४ | शुक्र [चन्द्र ५ शुक्र | बुघ | सूर्यं | गुरु | शनि शनि ३
७| ३|११| ६| ७ | शनि गुरु ६
शनि | शुक्र ' चन्द्र गुरु ` मंगळ,
बोधक पाचक आदि के अनुसार मैत्री
पदक ग्रह === | qç | चन्द्र s= | मंगल, मंगल | बि बुध | पुद गुरु | शुक्र qa | शनि ति
शत्रु | पाचक | पाचक | वेधक | बोधक | पाचक | वेधक |
मित्र | शेष शेष शेष शेष शोष दोष शेष
यह मैत्री नैसगिक मैत्री के अतिरिक्त है । ये भी ग्रहों के बळ विचारने के भिन्न २
जरिये हैं जिससे अच्छा या वुरा फल का विचार होता है।
जैसे शनि सर्य से छठा हो तो उसकी पाचक संज्ञा हो जाती है तब वह पाचक होने
के कारण सूर्य का शत्र, हुआ ।
पाचक आदि संज्ञा अनुसार ग्रहफल
(१) पाचक मित्र संज्ञक हो--मिष्ठान्न, मिष्टपान; श्रेष्ठ वस्त्र, भूषण की प्राप्ति, राज्य लाभ, घन लाभ अति सोल्य, मन म उत्साह बडा सामर्थ्य ।
PSU, --उपरोक्त का विपरीत फल .