सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमैत्री, दुष्टि आदि : ६३
अन्तर के गुणन फळ को विकला मानो उसे पूर्व प्राप्त उत्तर में अत्तर + के अनुसार जोड़ना या घटाना तो स्पष्ट दृष्टि कला विकला में प्राप्त हो जायगी । उदाहरण --मंगल की दृष्टि निकालनी है
ç रा रा (१) दृष्य गुक्र-११-१३०-३३'-४८० अन्तर ४-१०- २९” द्रष्टा मंगल ७-११-२९-४४ _(चक्र चक् १ १ से)े) ४-१ ४-१० = २८ २८ कम कम _
अन्तर-४-१-४-४ अन्तर-१ ऋण ." दृष्टि २८-५५१-५६" (आगे का कम होने से )
देषकला ४-४ x १ = ४-४?
पूवंप्राप्प २९"-०
॥ 00 1
= २८५५-५६ दृष्टि
| रा
(२) दृश्य सूयं ११-५-४३-४५ अन्वर ३-२३०-४७"'
दृष्टा मंगल ७-१२-२९-४४ (चक्र २ से) ३-२४- ३६ कम
अन्तर--३-२३-११-१ अन्तर-१ ऋण
शेष कला ११-१ > १ = ११-१7
पूर्व प्राप्त २७'-०”
-११-१
„. दृष्टि ३६-४८” , दृष्टि - ३६-४८-५९
यहाँ मंगल की विशेष दृष्टि चक्र हैँ राशि में ३ मिल गया इससे प्रकट हुआ कि
` विशेष दृष्टि है । इसके अंक मंगल को विशेष दृष्टि चक्र २ से लिये हैं । परन्तु पहिले
उदाहरण में शेष ४ था मंगल को विशेष दृष्टि चक्र २ में ४ राशि नहों थी । इस से
प्रगट हुआ क्रि मंगल की साघारण दृष्टि है इससे अंक साधारण दृष्टि चक्र १ से लिये
गये थे ।
यदि राशि घटाने से नहीं घटे तो ऊपर १२ राशि जोड़ कर घटाना ।