सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें६४ : ज्योतिष-शिक्षा तुतीय फलित खण्ड
जा
अंशों के विचार से दृष्टि का विचार और दृष्टि योग
ग्रहों का अन्तर दुष्टि योगों के नाम राशि - अंश 3
चिह्न | प्रभाव
अष्टमाँरा) x ॥ -४५ (पाउ | अशुभ s २ | चरिरेकादश (द्रिराश्यन्तर) Rise क ह ३ सदर (बतुंलपाद) ३ -९० = भतिभशुभ ४ | त्रिकोण (नवम-पंचम) TRON š: अतिणुभ ५ | साद्ध चतुष्टय राव्यंतर Yu ~ १३५ | बा858-- गशुभ
< पड़ाष्ट्रक ५ -?१५० «या यात्र अशुभ ७ क्र याचा ५ - १८० | ८? अशुभ ८ | युति दृष्टियोग (युति-योग) ° —° तिकर्ता-
९ एक राश्यन्तर युति यु ना १२ - ३६ ! क्या s Š š ५
१० | चक्र दशमांश २-२. ७२ L sh
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११ | चक्र पंचमांश Y š डॅड ९ जन
१२ | चक i जब नाडी वृत्त | + करे साद्धे द्वितीयांश
१३ | सम क्रांति
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फल
पाएचात्य विचार से अंशों के अंतर पर से इन दृष्टि योगों के नाम बताये हैं और
राशि के अनुसार फल का बिचार होता है ।
चर स्थिर आदि के अनुसार दृष्टि का विचार
चर राशि अपने से द्वितीय स्थान को छोड़कर सब स्थिर को देखती ë Ú स्थित ,, ,,
स्थिर ” बारहवें 121 17 चर 17 1) 0) द्विस्वभाव ,, अपने को छोड़कर शेष सब द्विस्वमाव को देखता है
जहां ग्रह हो उससे २-६-११ स्थान पर दृष्टि नहीं होती
जैमिनि सूत्र आदि में दृष्टि विषयक
यह विलक्षणता दृष्टि की बतलाई हूँ ।
एक राशि का दूसरी राशि पर दृष्टि
का यह अभिप्राय है उन राशियों में ग्रह
रहने में ग्रहों को भी दृष्टि उसो के
अनुसार होती हे । जैसे मेष की दृष्टि
सिंह बृक्चिक और कुंभ पर पडतो है ।
यदि मेष पर कोई ग्रह हो तो कहा
जायगा उस ग्रह की दृष्टि सिंह वृश्चिक कुंभ तथा इन राशियों म स्थित ग्रहों पर
पड़ती है ।