सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 84, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
स्त्री ग्रह स्त्री राशि में बळ पाते ë पुरुष ग्रह पुरुष राशि में बल पाते हैं ।
पुरुष ग्र ह-सूर्य मंगल गुरु-आरंभ में बली होते हैं ।
नपुंसक ग्रह बुध शनि- बीच में ,, ,,
स्त्रीग्रह चन्द्र शुक्र - अन्त में ,, ,,
इसके विपरीत नीच आदि में ग्रह का बल शून्य रहता है इसके और
उच्च के बीच के स्थान का वल अनुमान से निकालना । नीच शन्रुगृही, पाप
युक्त या पाप दृष्ट, पाप वर्ग में, संधि में, पापांश वाले सूर्य से अस्त ग्रह,
दृष्टि बल हीन ग्रह और अष्टक वर्ग में ४ से कम शुभ रेखा पाने वाले ग्रह
अशुभ होते हैं ।
केन्द्र में कोई राशि हो तो वह बलवान होती ë । पणफर में मध्यम और
आपोक्लिम में बलहीन होती है 1 इसी प्रकार आत्मकारक ग्रह से केन्द्र में
ग्रह पूर्ण बली, पणफर में अद्धं बली, आपोक्लिम में निबँल होता ë ।
ग्रहरहित राशि से सग्रह बली, दोनों में ग्रह हो तो अधिक संख्या के ग्रह
बली राशि बली होती है । दोनों में बराबर ग्रह हो तो उच्च, स्वगृही, मित्र
गृह आदि के विचार से बल विचारना ।
उच्च का बुघ पूर्ण फल देता हैं नहीं तो स्थान की योग्यता के अनुसार
फल देता है ।
(R) विग्बल
बुध गुरु--पूर्व दिशा में ( लग्न में ) बली होते हैं । ४,
सुर्य मंगल--दक्षिण ( दशम ) ,, ,,
दानि--पदिचिम (सप्तम) ,, ,,
चन्द्र शुक्र-उत्तर ( चतुर्थ) ,, ,,
(३) कालबल
चन्द्र शनि मंगल-रात्रि बली कृष्ण पक्ष में-पाप ग्रह बली सूर्य गुरु शुक्र--दिन बली शुक्ल ,, शुभ ,, ,, बुध --सदा बली
सभी ग्रह अपनी अपनी होरा में बली होते हैं, दिनेश, मासेश, वर्षेश भी बली होते हैं ।
ग्रह के स्वहोरा में हो तो वह उसका होरेश हुआ, उस मास का स्वामी मासेश, और
चन्द्र से नया वर्ष आरंभ के दिन वर्षश होता है ।
दिन ओर रात्रि के ३ भाग करने से दिन के भाग में, क्रमानुसार बुध शनि सूर्य और
रात्रि के भाग में क्रमानुसार चन्द्र शुक्र मंगल बली होते हैं । गुरु सदा दिन रात में बली होता है ।
(४) चेष्टा बल
जो ग्रह वक्री हो और बलवान् हो तो चेष्टात्रली होता है ।