भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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मैत्री, दृष्टि आदि : ७१

( ४ ) पाप आदि ग्रहों की दृष्टि व योग राशियों का बल होता है तथा उच्च मूल

त्रिकोण, स्वस्थान, अधिमित्र, मित्र राशि में गत ग्रह की दृष्टि योग राशियो का

बल होता है । ये अपने अधिकार प्रमाण से फल देते है 1

(५) जो राशि अपने स्वामी से युक्त दृष्ट हो, बुध या गुरुसे दृष्ट हो बह-राशि निदचय

बलवान होती ë ।

(६) जो राशि किसी ग्रह से युवत या दृष्ट न हो तो पूर्वोवत अपने भाव के अनुसार

फल देती ë ।

( ७ ) ग्रह युषत दृष्ट होने से उसके स्वभावानुसार फल करती ë

शुभ ग्रह के योग दृष्टि से पाप ग्रह भी शुभ फल देते हैं और पाप योग से शुभ भी

पाप फल देते हैं ।

( ८) जिस राशि पर चन्द्र हो तो वणित पूरा फल देता है परन्तु नक्षत्र राशि और चन्द्र

ये तीन हैं ये तीनों वली हों तो दशा फल बरावर हो । ,इन में एक बली हो तो

थोड़ा फल हो । कोई वली न हो तो कुछ फल न हो । ;

(९ ) जिस राशि पर पाप ग्रह हो, शत्रु ग्रह बैठा हो या शुभ ग्रह से युक्त दुष्ट न हो बह

बलहीन होती है 1

लग्न में-नर राशि बली

चतुथं मँ-जलचर राशि,,

सप्तम मॅ-कीट ., ., इनसे सप्तम स्थान में ये राशियां दशम में-पशु ,, ,, बलहीन होती हैं 1

द्विपद राशि-दिन वली

पशु राशि-रात्रि बली

कीट व जलचर-संघ्या बली ( सूर्योदय और अस्त समय )

लग्न घल-अपने स्वामी. के बल के अनुसार होता ë ।

लम्न मै नरराशि जल्चरया कीट राशि अन्य मत से पणं बल चतुष्पद, ० कीट १|४

आघा बल

लग्नेश-उपचय में या शुभग्रह युक्त हो, पाप दृष्ट न हो तो पूर्ण बली ।

लग्न बली-लग्नेश गुरु लग्न में हो लग्न--गुरु बुध शुक्र युत या दृष्ट हो पाप दृष्ट न हो ।

लग्न निर्बल--पाप युक्त हो तो हीन बल पाप ओर शुभ युक्त हो तो मध्यम बल ।

भाव बल-भावेश युक्त या दृष्ट या बली ग्रह से दृष्ट हो, पाप युक्त या दृष्ट न हो ।

अपने स्वामी के मित्र, या वुध या उच्च ग्रह से युक्त या दृष्ट हो या सम्पूणं

ग्रहों से दृष्ट हो तो बली ।

निग्रह से सग्रह स्थान बली है, सग्रह में अधिक. बलवाला बलवान होता है,

समता में चर स्थिर द्विस्वभाव के अनुसार क्रमसे बली समझना ।

१-४-७-१० भाव-उत्तरोत्तर बली हैं ।

५-९ ,,=भी उत्तरोत्तर बली हैं ।

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