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सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

` ४०० : ज्योतिष-शिक्षा, तुतीय फलित खण्ड

१२--व्यय में- ऐदवर्य युक्त, ग्राम में रहने का इच्छुक, कृपण बुद्धि, पशु का संग्रहः.

कर्ता, अल्पायु, जीवे तो अवश्य ही ग्रामाघीश हो (मान०) । विभूतियों वाला, ग्राम में निवास में चित्त, कृपणता युक्त बुद्धि, पशुओं को इकट्ठा करने वाला, दीघंजोवी होवे

ग्राम युक्त होता है (जा० qo) 1 अधिक व्यय, शरीर सुख से हीन, क्रोधी, मनुष्यों का हेषी (वृ० पा०) ।

(१२) व्ययेश का विशेष विचार $

(१) भाव सम्बन्धी पदार्थ को हानि--व्ययेश जिस भाव में हो या व्यय भाव में

कोई ग्रह हो उसके स्वगृह का जो भाव है उस भाव के सम्बन्ध के पदार्थ या उनके विषय

की हानि होतो है (फल०) । ,

(२) अच्छे महरू'योग आदि--व्ययेश या चन्द्रमा नवम, लाभ या पंचम भाव में

हो या अपने उच्च का या स्वगृही या रवनवांश का या लाभ, नवम, पंचम के नवांश में

हो तो अच्छे महल, सुगन्ध, पलंग आदि का योग मिलता ë ।

(३) स्त्रो सुख नहीं, अधिक व्यय--आदि व्ययेश अपने शत्रु, नीच या अस्त के नवांश मे, अष्टम स्थान मे या शत्रु स्थान में हो तो उसे स्त्री का सुख नहीं मिलता ! "अधिक व्यय होने से अधिक चिता रहती है ।

(४) स्त्रो से शोभित--व्ययेश केन्द्र या कोण में हा तो अपनी स्त्री से शोभित होता है? भावेश के फल पर विशेष विचार बोच भावेशो के फल पर विचार करते समय उनके बछाबल का विचार अवश्य करना चाहिये । जो ग्रह दो राशियों का स्वामी है उसका दोनों भावों के स्वामित्व के अनुसार

फल विचारना । यदि समान फल में विरोध हो तो दोनों का फल कहना । और भिन्न- भिन्न फल शुभ और ser जो हों वे दोनों ही फल होते हैं ।

जैसे वर्क लग्न वाले को मंगल पंचमेश और दशमेश भी हैं इस प्रकार वह दो भाव का स्वामी ë 1 qg यदि नवम भाव मे हो तो उसका पुत्र राजा या राजा के तुल्य व स्वयं अन्यवार विख्यात और कुल में श्रेष्ठ होता है ये फल ë परन्तु दशमेश का नवम भाव का फल राजकुलोत्पन्त राजा, अन्य राजा के तुल्य और घन पुत्रादि से युक्त होना बताया है । 'इस प्रकार दोनों फल समझना ।

इन दोनों में शुभ फल आया हो तो अति शुभ होगा । परन्तु तुल्य फल का विरोध इस प्रकार होता हे कि एक से घन की प्राप्ति हो और द्वितीय स्थान वश घन की यदि ' हानि प्रकट हो तो न तो घन की प्राप्ति होगी और न घन को हानि होगी इत्यादि । स्वोच्च, स्वनोच, आ(द स्थानस्थिति वश से पूर्ण मध्यम या अल्प फल होगा इसका भी विचार करना । ग्रह पुर्ण बली होतो पूण फल, मध्यम बली हो तो मध्यम, होनबलो हो त; अल्प फल प्रगट होगा ।

भावेश शुभग्रह है या अशुभ । शुभ ग्रह युक्त हे या अशुभ, या शुभ या अशुभ

'विचारते स्थान या

समय भाव मे है और शुभ या अशुभ ग्रह से दृष्ट है इन सब बातों का विचार फल: करना होता है । बोकि परिरिथतिवश फल में अन्तर पड़ जाता है ।

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(चित्र / चक्र पृष्ठ 417)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा

; बी० एल० ठाकुर : š

ज्योतिष के अधिकतर ग्रन्थ संस्कृत में ही हैं । किन्तु संस्कृत से अनभिङ्ज व्यक्तियों के लिए >

` इस माध्यम से यका अध्ययन कठिन Š । इसलिए हिन्दी में एक्‌ ऐसी पुस्तक की

` आवश्यकता थी, जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ज्योतिष का सरलता से अध्ययन कर

x

सके? ::

इस प्रयोजन को ध्यान में रखकर ही प्रस्तुत पुस्तक सात खण्डों में प्रकाशित की गई है ।

यसात खण्ड प्रारम्भिक ज्ञान, गणित, फलित, वर्ष-फल, प्रश्न मुहूर्त तथा संहिता खण्ड हैं ।

“प्रारम्भिक ज्ञान खण्ड: इस खण्ड के अध्ययन से ज्योतिप-सम्बन्धी वहुत-सी बातें समझ

में आ जाती हैं, जैसे किसी का जन्म, सम्वत्‌, मास, पक्ष, दिन, समय आदि ज्ञात न

| । : हो, तो केवल कुण्डली-चक्र देखकर सभी बातें बताई जा स्ती हैं । बिना पंचाङ्ग

i रथि नक्षत्र, करण, वार, सूर्य, चन्द्र आदि स्पष्ट बताए. ज,: :झते-हं । रल इसी

भाग के अध्ययन से संक्षि जन्म-पत्तिका बनाई जा सकते अन्त म.फलित- ,

सॅप्बन्धी मुख्य-मुख्य बातें संक्षेप में बताई गई हें २. ५४००-7४ uu

गणित खएड: इसके दो भाग हैं । इसमें पूरी जन्मपत्री बनाने की :; प्र है प्रर ? गणित. ।

| करने की सोदाहरण रीति देकर पूरी गणित-प्रक्रिया दी गई; .। 7.13 |

u: प्रथम भागः ९०; ; द्वितीय: श; ४० I

Md प्रथम भाग: इसमें फलित-सम्बन्धी बातें दी गई. -.5 Sisi से उदाहरण देकर समझाया गया है। |:

हरि भागः इसमें ग्रहों की दृष्टि, योग, वर्ग s: ज्योतिष के आवश्यक

क us पुर सूक्ष्म विवेचन किया गयाहै। . (अ) ८५; स). १४०

शि भागः इसमें विस्तृत दशा-विचार से सांथ भाग्य, धर्म, कीर्ति विद्या, बुद्धि,

0 दु:ख आदि विषयों पर विचार प्रकट किया गया| है, माता-पिता, भाई-बन्धु

“आदि सम्बन्धो पर ग्रह-प्रभाव का ज्ञान प्राप्त करने के लिए इस ग्रन्थ की उपादेयता |

: 00 ०७] अनुपम है I 24 qu

४, = फल खण्डः इसमें वर्ष-फल बनाने का पूरा गणित उदाहरण देकर समझोया गया

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3६८४00: इसमें प्रश्‍न-ज्योतिष सम्बन्धी बातें दी गई हैं और किसी प्रश्न का उत्तर देन

३ कै, अभ्यास उदाहरण देकर समझाया गया है। । ४०

इसमें राष्ट्रीय ज्योतिष-सम्बन्धी विषयों पर विस्तार से विचार किया गया

|

k र 'है॥ अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियो के अनुसार देश या नगर कौ राशि स्थिर

Š करने के प्रकार बताए गए Š .। किसी भी देश के भविष्य की जानकारी के लिए । 5 ज्योतिर्विद्‌ इस खण्ड का सफल उपयोग कर सकते हैं । भविष्यवाणी में प्राच्य और

S ~. Tamara दोनों रीतियों का च कम सारगर्भित वर्णन है । स्या | ६५

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ली वाराणसी पटना बंगलोर मद्रास

मूल्य; रू० ८५ कन

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