सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 104, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें९६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
जब ४ प्रकार से वल निकाला जाता है तो प्रत्येक वल का ५ विशोपका वल होता
है । इस प्रकार ४% ५-२० हो जाता है परन्तु जब ५ प्रकार से हर्ष वल निकालते
हैं तो प्रत्येक का ४ विशोपका वल होता है। ५ > ४-२० विश्योपका वल । ग्रह पूरा २० विशोपका देने से पूर्ण वली हो जाता है । न
हर्ष बल साधन के नियम
जो ग्रह नीचे बताये ४ प्रकार से हषित होते हैं वे ५ वल पाते हैं ।
(१) ग्रह सूर्यं चंद्र मंगल बुध गुह शुक्र शनि
भाव ९ ३ ६ लग्न ११ श्र १२
ये ग्रह यहाँ बताये हुए भाव से हृषित होते हैं । जैसे वुध लग्न में हो तो हापित
होता है तब उसे ५ वल मिलता है । इन स्थानों में न हो तो बल नहीं मिलता ।
(२) जो ग्रह अपनी स्वराशि में या उच्च में होता है तो हषित होता है । चाहे
स्व राशि में हो या चाहे उच्च में हो या दोनों हों वल ५ ही मिलेगा ।
(३) लग्न से ४, ५, ६, १०, ११, १२ भाव में पुरुष ग्रह हृषित होते हैं ।
- १, २, ३, ७, 5५, ९ 7 » स्त्री ग्रह „ „
यहाँ भाव के अनुसार बल पाता है न कि राशि के अनुसार ।
पुरुष ग्रहस्सूयं, गुरु, मंगल इसमें नपुंसक ग्रह का विचार नहीं होता ।
स्त्री ग्रहन्चंद्र, बुध, शुक्र, शनि
यहाँ ग्रह की राशि जो हो परन्तु भाव में होना आवश्यक है।
(४ ) वर्ष प्रवेश दिन में हो तो-पुरुष ग्रह हषित होते हैं ।
४. रात्रि ,, २5 स्त्रीग्रह ५ # कोई इस प्रकार भी विचार करते हैं :--
(५) पुरुष ग्रह सूर्यं गुरु मंगल विषम राशि १, ३, ५, ७, ९, ११ में हृषितः
होते हैं ।' :
स्त्री ग्रह चंद्र, बुध, शुक्र शनि, सम राशि २, ४, ६, ८, १०, १२ में हपित होते
हैं । विशोपका वलरइन सब के प्राप्त वल का योग करने से विशोपका वल होता है ।
उदाहरण
हषंवल चक्र
ग्रह सूर्य चंद्र मं० वु० गु० शु० शनि
१ हपं कारक भाव 9 lo oY No न
२ स्वराशि या उच्च RC 6 20 05 MR
३ भाव में स्त्री पुछषप ग्रह. ५ ० ० ० श ० ५ ४ वपं प्रवेश में स्त्री पुरुपग्रह ० ५ ० श ० ४५ ४५
विशोपका यल योग ५ ५ ० ५ १० १० १०
०० कक गा ७०४४७-०००५-३५० क