सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 105, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वाददा वर्गी वळ साधन : ९७
(१) केवल गुरु लाभ भाव में होने से ५ वल पाया । और कोई ग्रह उन भावों
में से किसी में नहीं हैं जो चक्र में बताये हैं। इस कारण शेष ग्रहों को कोई वल
नहीं मिला । . द्
(२) कोई ग्रह स्वराशि में नहीं हैं इससे स्वराशि का बल तो नहीं मिला परन्तु
शुक्र उच्च का होने से ५ वल पाया ।
(३) यह सूर्य पुरुष ग्रह ४ भाव में है वर्ष वळ ५ मिला । गुरु पुरुष ग्रह ११
भाव में होने से ५ बल पाया । शनि स्त्री ग्रह अष्टम भाव में होने से ५ बल पायां।
इनके अतिरिक्त और कोई ग्रह वहाँ बताये अनुसार नहीं हैं इससे उनको ० मिला ।
(४) यहाँ वर्ष प्रवेश रात्रि में हुआ है इस कारण स्त्री ग्रह चंद्र, बुध, शुक्र श्नि ५
हषं बल पा गये ।
सबका योग करने से सूर्यं चंद्र बुध गुरु शुक्र शनि का विशोपका बल हुआ ।
५ ५ ५१३१० १०
प्रायः लोग ४ ही प्रकार से हर्ष बळ निकालते हैं ।
५ प्रकार से हषं वल का उदाहरण नीचे दिया है।
५ प्रकार से हर्ष बल चक्र
| ग्रह सूर्यं द्र मं० वु० गु० शु»? शनि
१ इषं कारक भाव ० ० ० ० ४ ०.०
२ स्वराशि या उच्च ७ ० ० ००० ०
३ भाव में स्त्री पुरुष ग्रह ४ ००० ० ४ ० ०
४ वर्ष प्रवेश में स्त्री पुरुष प्र. ० ४ ० ४ ० ४ ४
५ सम विषम राशि में स्त्री पुरुष ग्रह ० ४ ४ ४ ४ ४ ०
विशोपका ब, | ४ ८ ४ ८१२१२ ८
इसमें शेष चारों नियम के अनुसार उपरोक्त ही विचार कर ५ के स्थान में यही
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