सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 106, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें९८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुर्थ वर्षफल खण्ड
४-४ बल दिया गया है। अंतिम ५ का अब विचार करना है--
(१) सूर्य पुरुष ग्रह मीन स्त्री राशि में होने से बल ० । (२) चंद्र स्त्री ग्रह कन्या
स्त्री राशि में वळ>४ । (३) मंगल पुरुष ग्रह मिथुन पुरुष राशि में बल=४। (४) बुध
स्त्री ग्रह मीन स्त्री राशि में वल=४। (५) गुरु पुरुष ग्रह तुला पुरुष राशि में बल=४।
(६) शुक्र स्त्री ग्रह मीन स्त्री राशि में वल=४। (७) शनि स्त्री ग्रह मिथुन पुरुष राशि में बल-०।
अध्याय १२
त्रिपताका चक्र
ग्रहों का वेध जानने के लिए त्रिपताका चक्र बनाया जाता है। त्रिपता का चक्र
बनाने की रीति--
चक्र का पहला रूप दूसरा रूप
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४ १५
जज काप १०
पहि लिया र 1 जाची ७
६ ७ |]
त्रिपताका चक्र बनाने में अटपटा लगता है ।
उसको बनाने के लिए पहिले ३ आड़ी ३ खड़ी
रेखाएँ खींचो जैसा रूप १ में बताया है और रेखाओं
के छोर में यहाँ बताये अनुसार अंक लिख दो ।
उपरांत १, ४, ७, १० रेखा को ऊपर रूप
२ में बताये अनुसार मिला कर एक चौखटा बना
दो। फिर ५ को १२ से, ६ को ११ से, २ को ९
से और ३ को ८ से मिला दो, जैसे तीसरे रूप में
बताया है। यही त्रिपताका चक्र वन गया । जहाँ
१ लिखा है लग्न स्थान समझो ।
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