सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 120, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ें११२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, चतुथं वर्षफल खण्ड
पत्यांश को शुद्धांश भी कहते हैं। क्योंकि वह अंशों से शोधन कर निकाला जाता
है । पत्य श योग को सर्वाधिकांश भी कहते हैं 1 क्योंकि यह सबसे अधिक अंश वाले
ग्रह के बराबर होता है । 5
दक्षापाक समय 1 2 दशा के भुक्त होने का समय सौर वर्ष प्रमाण से १ वर्ष के ३६० दिन होते हैं
और सावन मान से दिन ३६५ घ० १५ प० ३१ वि० ३० का होता है।
परन्तु सरलता के लिए कई लोग सौर मान के ३६० दिन के अनुसार ही दशा
साधन करते हैं क्योंकि दोनों रीतियों से ही से करने में बहुत थोड़ा अन्तर
पड़ता है ।
सौर मान से=३६० दिन=२१६०० घड़ी=१२९६००० पल होते हैं । सावन मान
से=दिन ३६५ घ० १५ पल० ३१ वि० ३०=१३१४९३१ पल ३० वि० होते है ।
पत्यांझ का ध्र.व निकालना
गणित की सुगमता के लिए ध्रुव निकाल लेना चाहिए-। पत्यांश दशा का योग
जितने अंशादि हों वह पूरा ३६० दिन में भुक्त होता है तो एक अंश में कितने होंगे
यह निकाळने को वर्ष के दिन प्रमाण में पत्यांश के योग का भाग देना तो घव
निकल आता है । भाग देने की सरलता के लिए अंश कलादिं सबके विकला वना
लेना । इसी प्रकार ३६० दिन के भी घड़ी पळ बना लेना । ३६०दिन=९६० ५ ६०८
२१६०० घड़ी या २१६०० > ६०=१२९६००० पल होते हैं । इस कारण १२९६०००
पल में प्रत्यांश योग की विकला बनाकर भाग देना तो उत्तर दिन घड़ी पल विपछ में
आयगा वही धव होगा 1
वषं दिन _ ३६० _ १२९००० पल _
प्याश योग पत्यांशयोग अंशादि पत्यांश योग विकला षः विन दती
पल विपल ।
ग्रह दशा--ध्रुव > ग्रह पत्यांश-दशा दिन आदि
जिस ग्रह की दशा निकालनी हो उसके चक्र ४ के अनुसार पत्यांश लेकर उसका
गुणा धव में करना तो उस ग्रह की दशा के दिन घड़ी पल आदि निकल आयेंगे ।
गोमुत्रिका क्रम से गुणनफल चक्र की सहायता से दोनों का गुणा कर गुणनफल निकाल
लेना सरळ है जिसकी रीति गणित खंड ज्योतिष शिक्षा भाग ३ में दी है। इसप्रकार
आठौं ग्रह की दशा निकाल कर सवका योग करना । यदि सवका योग ३६० आवे
तो गणित ठीक समझना ।
` इस प्रकार दशा निकाल कर चक्र ५ में रखना । फिर वर्ष प्रवेश के सूर्य में
प्रत्येक ग्रह की दक्षा के दिन जोडते जाना तो उस दशा का ठीक समय निकल आता
है । राशिमें+- मास । अंशमें + दिन । कलामें+घड़ी। विकलामें + पल जोड़कर प्रथम
चक्र बना लेना ।
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