सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ४
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 4
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 121, कुल 280 में से
संदर्भ में पढ़ेंपत्यांशी दशा साधन का उदाहरण
पत्यांशी दशा साधन : ११३
सम्बत २००१ गताब्द ५५ का वर्ष प्रवेश निकाला । सम्वत् २००२ चैत्र शुक्ल ६ सोमवार इष्ट २९घ०-४४प०-१२॥वि० प्र वर्ष प्रवेश हुआ। इस समय का ग्रह स्पष्ट किया जिस पर से पत्यांशी दशा का साधन करना है। चक १ चक्र २ अंश का
राशि छोड़कर शेष १ सूयं ११र-५९-२३/-९” १ सूर्य ५०-३३०९
२ चंद्र १ -१६-४४-२० २ चंद्र १६- ४४- २०
३ मंगल १०-२--४६-२१ ३ मंगल २- ४६- २१
४ बुध ११--२०-२३-१४ ४ बुध २०--२३- १४ ५ गुर ५--२--१८-३० ४५ गुरु २--१८- ३०
६ शुक्र ०---७--१९-४१ ६ शुक्र ७--१९- ४१ ७ शति २--१२-१-- १ ७ शनि १२-१-- १ ८ लग्न ५-१ ४--१३-१६ ८ लग्न ४-१३- १६
चक्र ३ ' हीनांश
अल्प अंश का पहिले
१ गुरु २०-१८-३०
२ मंगल २-४६ -२१
३ लग्न ४-१३ -१६ ४ सूर्यं ५-३३ -९
५ शुक्र ७-१९ -९१
६ शनि १२-१ --१
७ चन्द्र १६-४४ -२०
८ वुध २०-२३ -२४
हा
चक्र ४ पत्यांश या शुद्धांश चक्र चक्र ५ पत्यांश एक दूसरे से अन्तर की विकला
ग्रह ० 4 1
१ गुरु २-१८-२० =५३१०”
२ मंगल ०-२७-५१ =१६७१
, ३ ठग्न १-२६-५५ ५२१५
४ सुयं १-१९-५३ =४७९२
५ शुक्र १-४६-३२ =६३९२
६ शनि ४-४१-२० =१७८६०
७ चन्द्र ४-४३-१९ =१६९९९
८ बुध ३-३८-५४ =१३१३४
पत्यांश
योग २०-२३-१४ - =१३३९४
प्वुध-२०-२३-१४
¬ _ सर्वाधिकांश
यहाँ चक्र १ वर्ष प्रवेश समय
के ग्रह स्पष्ट दिये हैं ।
चक्र २=चक्र १ में जो ग्रह
स्पष्ट दिये हैं उनकी केवल राशि
छोड़कर शेष अंश कलादि चक्र २
में दिये हैं ।
चक्र ३=चक़् २ में खोजा
तो सबसे अल्प भंश वाला गुरु
२०-१८-३०“ है उसे चक्र ३ में
सवसे ऊपर रखा फिर उसके आगे
उससे कुछ बड़ा अंश वाला ग्रह
रखा इस प्रकार बढ़ती अंश क्रम से
सबसे अधिक अंश वाला ग्रह बुध
२०१०-२३-१४” है वह सबके
अंत में आ गया । इस चक्र में
सबसे कम अंश वाला सबसे ऊपर है भौर क्रमानुसार कुछ बड़े अंश वाले उसके नीचे
रखे गये हैं। यह हीनांश चक्र है 1
चक्र ४=पत्यांश चक्र । इसमें सबसे कम अंश वाला गुरु सबसे ऊपर रखा । फिर
चक्र ३ में देखकर उसके आगे दिये ग्रह का अंतर आगे निकाल कर रखा है । जैसे
चक्र में गुरु के नीचे मंगल है । मंगल और गुरु का अन्तर निकाल कर मंगल के आगे
चक्र ४ में रखा । फिर मंगल और लग्न का अन्तर लग्न के सामने रखा सूर्य और
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